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एनएसई ने निफ्टी बैंक और निफ्टी मिड सिलेक्ट के डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट्स के लॉट साइज में किया बदलाव
Posted Date : 30-Mar-2025 10:01:25 pm

एनएसई ने निफ्टी बैंक और निफ्टी मिड सिलेक्ट के डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट्स के लॉट साइज में किया बदलाव

मुंबई । नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) ने निफ्टी बैंक और निफ्टी मिड सिलेक्ट के डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट्स के लॉट साइज में बदलाव किया है।
एनएसई के फ्यूचर्स और ऑप्शनंस (एफएंडओ) डिपार्टमेंट द्वारा निकाला गया सर्कुलर सेबी के दिशानिर्देशों के अनुरूप जारी किया गया है।
नए सर्कुलर में निफ्टी बैंक के मौजूदा लॉट साइज को 30 से बढ़ाकर 35 कर दिया गया है। वहीं, निफ्टी मिड सिलेक्ट के एफएंडओ लॉट साइज को बढ़ाकर 140 कर दिया गया है, जो कि पहले 120 था।
इसके अलावा एनएसई ने अन्य किसी इंडेक्स के डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट में कोई बदलाव नहीं किया है।
निफ्टी 50 के एफएंडओ कॉन्ट्रैक्ट्स का लॉट साइज 75 बना हुआ है। इसके अलावा, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज के लॉट साइज को 65 और निफ्टी नेक्स्ट 50 के लॉट साइज को 25 पर बरकरार रखा गया है।
निफ्टी बैंक और निफ्टी मिड सिलेक्ट इंडेक्स के डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट्स में बदलाव मौजूदा मंथली एक्सपायरी कॉन्ट्रैक्ट्स 24 अप्रैल, 2025, 29 मई, 2025 और 26 जून, 2025 से नहीं होगा। बल्कि, यह 31 जुलाई को होने वाली मंथली एक्सपायरी से प्रभावी होगा।
इससे पहले, एनएसई ने निफ्टी, बैंक निफ्टी समेत सभी इंडेक्सों की एक्सपायरी ‘महीने के आखिरी सोमवार’ को करने का फैसला लिया था।
एनएसई की ओर से जारी सर्कुलर में कहा गया कि निफ्टी, बैंक निफ्टी, फिननिफ्टी, निफ्टी मिडकैप सिलेक्ट और निफ्टी नेक्स्ट 50 के एफएंडओ कॉन्ट्रैक्ट्स की एक्सपायरी हर महीने के आखिरी सोमवार को होगी।
लेकिन भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के आदेश के बाद, इस सर्कुलर पर फिलहाल के लिए रोक लगा दी गई है।
सेबी के आदेश में कहा गया कि सभी डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट्स की एक्सपायरी मंगलवार और गुरुवार में से किसी एक दिन हो सकती है।
सेबी की ओर से यह आदेश ऐसे समय पर दिया गया था, जब एक्सचेंज डेरिवेटिव्स सेगमेंट में अधिक मार्केट शेयर हासिल करने के लिए एक्सपायरी में बदलाव कर रहे थे।

 

अधिक यूएस टैरिफ से भारतीय फार्मा कंपनियों को मार्केट शेयर बढ़ाने में मिलेगी मदद : रिपोर्ट
Posted Date : 30-Mar-2025 10:00:56 pm

अधिक यूएस टैरिफ से भारतीय फार्मा कंपनियों को मार्केट शेयर बढ़ाने में मिलेगी मदद : रिपोर्ट

मुंबई । बढ़ते अमेरिकी टैरिफ से भारतीय फार्मा कंपनियों को मार्केट शेयर बढ़ाने में मदद मिल सकती है। यह जानकारी जेपी मॉर्गन की रिपोर्ट में दी गई।
जेपी मॉर्गन की रिपोर्ट में बताया गया कि भारतीय दवा कंपनियों में बेहतर लागत प्रतिस्पर्धात्मकता के कारण अपने वैश्विक प्रतिस्पर्धियों की कीमत पर बाजार हिस्सेदारी हासिल करने की क्षमता है।
ब्रोकरेज फर्म ने कहा कि अधिक टैरिफ के कारण इस बात की भी संभावना कम है कि भारतीय फार्मा कंपनियां अपनी मैन्युफैक्चरिंग सुविधाओं को अमेरिका में शिफ्ट करें।
जेपी मॉर्गन ने कहा कि उपभोक्ताओं के लिए दवाइयों की कीमत में वृद्धि और सीमित आपूर्ति के चलते फार्मास्यूटिकल्स पर 25 प्रतिशत या उससे अधिक टैरिफ असंभव है।
रिपोर्ट में बताया गया कि अगर फार्मास्यूटिकल्स पर 10 प्रतिशत का टैरिफ लगाया जाता है, तो इसका एक बड़ा हिस्सा ग्राहकों को हस्तांतरित कर दिया जाएगा। इसकी वजह दवाइयों की नियमित मांग बने रहना है।
टैरिफ में बढ़ोतरी का बाकी बचा हिस्सा मैन्युफैक्चरर्स और फार्मेसी बेनिफिट मैनेजर्स (पीबीएम) द्वारा वहन किया जाएगा।
टैरिफ वृद्धि से दवाओं की लागत बढऩे की आशंका है और मध्यम अवधि में अमेरिका में मरीजों के लिए बीमा प्रीमियम में भी वृद्धि होगी। ब्रोकरेज ने कहा कि अगर टैरिफ जारी रहता है, तो बड़ी भारतीय फार्मा कंपनियां अपनी बातचीत की शक्ति बढ़ाने के लिए एकजुट हो सकती हैं, लेकिन उनके बाजार से बाहर निकलने की संभावना नहीं है।
जेपी मॉर्गन का यह भी मानना है कि बायोसिमिलर को टैरिफ से छूट दी जा सकती है। अमेरिका में इन उत्पादों के लिए सीमित मैन्युफैक्चरिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर होने के कारण मांग का करीब 70 प्रतिशत हिस्सा आयात से पूरा किया जाता है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि बायोसिमिलर पर टैरिफ लगाने से मरीजों के लिए लागत बढ़ सकती है।
जेपी मॉर्गन की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के अलावा, इजराइल और स्विट्जरलैंड से आने वाली जेनेरिक दवाओं पर आयात शुल्क लगाए जाने की संभावना बहुत अधिक है। इसकी वजह इन देशों में टेवा और सैंडोज जैसी दवाओं की बड़ी मैन्युफैक्चरिंग क्षमताएं होना है।
रिपोर्ट के मुताबिक, ये कंपनियां भारतीय कंपनियों की तुलना में कम लाभ मार्जिन पर काम करती हैं और इसलिए टैरिफ से उन पर अधिक प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

 

यूपीआई के नए नियम 1 अप्रैल से होंगे लागू, इनएक्टिव मोबाइल नंबर वाले यूजर्स को आ सकती है परेशानी
Posted Date : 30-Mar-2025 10:00:34 pm

यूपीआई के नए नियम 1 अप्रैल से होंगे लागू, इनएक्टिव मोबाइल नंबर वाले यूजर्स को आ सकती है परेशानी

नई दिल्ली ।  नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) ने न्यूमेरिक यूपीआई आईडी सॉल्यूशन पर हाल ही में यूपीआई नंबर से जुड़े भुगतानों के लिए कस्टमर एक्सपीरियंस बढ़ाने के उद्देश्य से नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। नए दिशानिर्देश 1 अप्रैल से प्रभावी होंगे।
इन नए दिशा-निर्देशों का पालन किया जाना यूपीआई मेंबर बैंक, यूपीआई ऐप्स और थर्ड पार्टी प्रोवाइडर के लिए जरूरी होगा। नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, इनएक्टिव मोबाइल नंबर से जुड़ी यूपीआई आईडी भी इनएक्टिव हो जाएगी। अगर किसी यूपीआई यूजर का बैंक में रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर लंबे समय से इनएक्टिव है तो यूजर की यूपीआई आईडी भी अनलिंक हो जाएगी और यूजर यूपीआई सर्विस का इस्तेमाल नहीं कर सकेगा। ऐसे में यूपीआई सर्विस का इस्तेमाल करने वाले हर यूजर को यह सुनिश्चित करने की जरूरत होगी कि उसके बैंक में रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर एक्टिव हो।
सही मोबाइल नंबर के साथ बैंक रिकॉर्ड अपडेट रखे जाने पर ही यूपीआई सर्विस का बिना किसी परेशानी के इस्तेमाल किया जा सकेगा। इनएक्टिव या दोबारा असाइन किए गए मोबाइल नंबर को लेकर उनसे जुड़ी यूपीआई सर्विस को लेकर परेशानी आ सकती है। टेलीकॉम डिपार्टमेंट के नियमों के अनुसार, डिसकनेक्ट होने पर मोबाइल नंबर 90 दिन बाद एक नए यूजर को असाइन किया जा सकता है। अगर किसी ग्राहक का मोबाइल नंबर कॉल, मैसेज या डेटा के साथ इस्तेमाल न किया जा रहा हो तो ऐसे नंबर को टेलीकॉम प्रोवाइडर्स डिएक्टिवेट कर देते हैं। इन नंबरों को रिसाइकल या चर्न्ड नंबर कहा जाता है। नए दिशा-निर्देशों के तहत यूजर का बैंक-वेरिफाइड मोबाइल नंबर यूजर के यूपीआई आइडेंटिटीफायर के रूप में काम करेगा। जिसके साथ यूजर अलग-अलग यूपीआई ऐप्स का इस्तेमाल कर सकता है।
दूसरी ओर बैंक और यूपीआई एप्लीकेशन को भी अपने मोबाइल नंबर रिकॉर्ड्स को हर हफ्ते अपडेट करने की जरूरत होगी, जिससे रिसाइकिल या मॉडिफाइड नंबर से होने वाली गलतियों से बचा सके। न्यूमेरिक यूपीआई आईडी असाइन करने से पहले एप्लीकेशन को यूजर्स से इजाजत लेने की जरूरत होगी। यूजर्स को इस फीचर के लिए एक्टिवली ऑप्ट इन करना होगा, यह डिफॉल्ट सेटिंग में ऑप्ट आउट है। किसी स्थिति में अगर एनपीसीआई के वेरिफिकेशन में कुछ देरी होती है तो यूपीआई एप्लिकेशन अस्थायी रूप से न्यूमेरिक यूपीआई आईडी से जुड़ी समस्याओं को इंटरनली हल कर सकते हैं। इन मामलों का डॉक्यूमेंटेशन किया जाना जरूरी होगा और निरीक्षण उद्देश्यों के तहत हर महीने एनपीसीआई को रिपोर्ट किया जाना जरूरी होगा।

 

केंद्र सरकार ने 3,712 करोड़ रुपये के पटना-सासाराम 4-लेन हाइवे प्रोजेक्ट को दी मंजूरी
Posted Date : 29-Mar-2025 11:02:20 pm

केंद्र सरकार ने 3,712 करोड़ रुपये के पटना-सासाराम 4-लेन हाइवे प्रोजेक्ट को दी मंजूरी

नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति (सीसीईए) ने शुक्रवार को बिहार में पटना से शुरू होकर सासाराम तक जाने वाले 120 किलोमीटर तक के 4-लेन प्रवेश-नियंत्रित ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड पटना-आरा-सासाराम कॉरिडोर के निर्माण को मंजूरी दी।
सीसीईए ने बैठक के बाद जारी किए बयान में कहा कि प्रोजेक्ट हाइब्रिड एनुटी मोड (एचएएम) में डेवलप किया जाएगा। इसकी लागत 3,712.40 करोड़ रुपये होगी। एचएएम एक पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल है जिसे सडक़ इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में निजी क्षेत्र की भागीदारी को पुनर्जीवित करने के लिए डिजाइन किया गया है। सरकार प्रोजेक्ट के निर्माण के दौरान निजी डेवलपर को वार्षिक भुगतान के रूप में लागत का 40 प्रतिशत प्रदान करती है। निजी डेवलपर प्रोजेक्ट लागत का शेष 60 प्रतिशत लोन या इक्विटी के माध्यम से जुटाता है। सरकार द्वारा जारी बयान में कहा गया कि वर्तमान में, सासाराम, आरा और पटना के बीच संपर्क मौजूदा स्टेट हाईवे (एसएच-2, एसएच-12, एसएच-81 और एसएच-102) पर निर्भर करता है, जिसमें आरा शहर सहित भारी यातायात के कारण 3 से 4 घंटे लगते हैं। मौजूदा ब्राउनफील्ड हाईवे के 10.6 किमी के अपडेट के साथ एक ग्रीनफील्ड कॉरिडोर विकसित किया जाएगा, जिससे बढ़ती भीड़ को कम किया जा सके, जिससे आरा, गड़हनी, पीरो, बिक्रमगंज, मोकर और सासाराम जैसे स्थानों में घनी आबादी वाले क्षेत्रों की जरूरतें पूरी हो सकेंगी।
यह प्रोजेक्ट एनएच-19, एनएच-319, एनएच-922, एनएच-131जी और एनएच-120 सहित प्रमुख परिवहन गलियारों को एकीकृत करता है, जिससे औरंगाबाद, कैमूर और पटना को निर्बाध संपर्क प्रदान होता है। इसके अतिरिक्त, यह प्रोजेक्ट 02 हवाई अड्डों (पटना में जय प्रकाश नारायण अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा और आगामी बिहटा हवाई अड्डा), 04 प्रमुख रेलवे स्टेशनों (सासाराम, आरा, दानापुर, पटना) और 01 अंतर्देशीय जल टर्मिनल (पटना) को कनेक्टिविटी प्रदान करेगा और पटना रिंग रोड तक सीधी पहुंच बढ़ाएगी, जिससे माल और यात्री आवागमन में तेजी आएगी। पूरा हो जाने पर, पटना-आरा-सासाराम कॉरिडोर क्षेत्रीय आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और इससे लखनऊ, पटना, रांची और वाराणसी के बीच संपर्क में भी सुधार होगा। यह प्रोजेक्ट सरकार के आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप है, इससे रोजगार सृजन होगा, इन्फ्रास्ट्रक्चर में वृद्धि होगी और बिहार में सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। इस प्रोजेक्ट से 48 लाख मानव दिवस रोजगार सृजित होंगे तथा पटना और आसपास के विकासशील क्षेत्रों में विकास, प्रगति और समृद्धि के नए रास्ते खुलेंगे।

 

इस साल फरवरी में कोर सेक्टर इंडस्ट्री में 2.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज : केंद्र
Posted Date : 29-Mar-2025 11:02:06 pm

इस साल फरवरी में कोर सेक्टर इंडस्ट्री में 2.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज : केंद्र

नई दिल्ली । वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा हाल ही में जारी आंकड़ों के अनुसार, सीमेंट, उर्वरक, इस्पात, बिजली, कोयला और रिफाइनरी उत्पादों के उत्पादन में सकारात्मक वृद्धि दर्ज किए जाने के कारण इस साल फरवरी में आठ कोर इंडस्ट्री (आईसीआई) के संयुक्त सूचकांक में 2.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
इससे पहले नवंबर 2024 के लिए आठ कोर इंडस्ट्री के सूचकांक की अंतिम वृद्धि दर 5.8 प्रतिशत देखी गई। मंत्रालय के अनुसार, अप्रैल से फरवरी, 2024-25 के दौरान आईसीआई की संचयी वृद्धि दर पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 4.4 प्रतिशत है। फरवरी, 2024 की तुलना में इस बार फरवरी 2025 में कोयला उत्पादन में 1.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई। अप्रैल से फरवरी, 2024-25 के दौरान इसका संचयी सूचकांक पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 5.6 प्रतिशत बढ़ा। फरवरी में इस्पात उत्पादन में 5.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई और अप्रैल से फरवरी, 2024-25 के दौरान इसका संचयी सूचकांक पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 6.5 प्रतिशत बढ़ा।
फरवरी, 2025 में पेट्रोलियम रिफाइनरी उत्पादन में फरवरी, 2024 की तुलना में 0.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई। अप्रैल से फरवरी, 2024-25 के दौरान इसका संचयी सूचकांक पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 3.1 प्रतिशत बढ़ा। 2024-25 के दौरान उर्वरक उत्पादन में पिछले महीने 10.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई तथा अप्रैल से फरवरी, 2024-25 के दौरान इसका संचयी सूचकांक पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 2.4 प्रतिशत बढ़ा। अप्रैल से फरवरी के दौरान सीमेंट उत्पादन में 10.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई तथा इसका संचयी सूचकांक 5.1 प्रतिशत बढ़ा। मंत्रालय के अनुसार फरवरी, 2025 में बिजली उत्पादन में फरवरी, 2024 की तुलना में 2.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई। अप्रैल से फरवरी 2024-25 के दौरान इसका संचयी सूचकांक पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 4.9 प्रतिशत बढ़ा। आईसीआई आठ प्रमुख इंडस्ट्री के उत्पादन के संयुक्त और व्यक्तिगत प्रदर्शन को मापता है।

 

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 4.5 अरब डॉलर बढक़र 658.8 अरब डॉलर हुआ
Posted Date : 29-Mar-2025 11:01:38 pm

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 4.5 अरब डॉलर बढक़र 658.8 अरब डॉलर हुआ

मुंबई । भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, 28 मार्च, 2025 को समाप्त हुए सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 4.5 अरब डॉलर बढक़र 4 महीने के उच्चतम स्तर 658.8 अरब डॉलर पर पहुंच गया।
आरबीआई के मुताबिक, फॉरेन करेंसी एसेट्स (एफसीए) 1.6 अरब डॉलर गिरकर 558.86 अरब डॉलर हो गया। एफसीए में विदेशी मुद्रा भंडार में रखे गए यूरो, पाउंड और येन जैसी गैर-अमेरिकी इकाइयों की मूल्यवृद्धि या मूल्यह्रास का प्रभाव शामिल होता है। इस कारण से विदेशी मुद्राओं में होने वाला उतार-चढ़ाव का असर एफसीए पर देखा जाता है। समीक्षा अवधि के दौरान, गोल्ड रिजर्व 2.8 अरब डॉलर बढक़र 77.2 अरब डॉलर हो गया है। इससे पहले 14 मार्च को समाप्त हुए हफ्ते में, देश का विदेशी मुद्रा भंडार 0.305 अरब डॉलर बढक़र 654.27 अरब डॉलर हो गया था। यह लगातार तीसरा हफ्ता है, जब देश के विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़त देखने को मिली है। सितंबर 2024 में विदेशी मुद्रा भंडार बढक़र 704.885 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया था।
देश के विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़त से रुपये को मजबूती मिलती है जो अर्थव्यवस्था के लिए भी अच्छा है। विदेशी मुद्रा भंडार में हाल ही में हुई बढ़ोतरी से रुपया भी मजबूत हुआ है। विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि अर्थव्यवस्था के मजबूत बुनियादी ढांचे को दर्शाती है और इससे आरबीआई को रुपये में अस्थिरता आने पर उसे स्थिर करने के लिए पर्याप्त जगह मिलती है। मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार, भारतीय रिजर्व बैंक को रुपये को गिरने से रोकने के लिए अधिक डॉलर जारी करके हाजिर और अग्रिम मुद्रा बाजारों में हस्तक्षेप करने में सक्षम बनाता है। इसके विपरीत, विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट के कारण आरबीआई के पास रुपये को सहारा देने के लिए बाजार में हस्तक्षेप करने की कम जगह रह जाती है। इसके अतिरिक्त, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, भारत का व्यापारिक व्यापार घाटा फरवरी में घटकर 14.05 अरब डॉलर रह गया, जो जनवरी में 22.99 अरब डॉलर था। देश का व्यापारिक निर्यात फरवरी में 1.3 प्रतिशत बढक़र 36.91 अरब डॉलर हो गया, जबकि जनवरी में यह 36.43 अरब डॉलर था। वहीं, आयात 16.3 प्रतिशत घटकर 50.96 अरब डॉलर रह गया, जबकि पिछले महीने यह 59.42 अरब डॉलर था।