नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने सोमवार को इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (आईआरसीटीसी) और इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन (आईआरएफसी) को नवरत्न केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उद्यम (सीपीएसई) का प्रतिष्ठित दर्जा दे दिया है। इसकी वजह दोनों कंपनियों द्वारा नवरत्न का दर्जा पाने के लिए जरूरी शुद्ध लाभ और नेटवर्थ जैसे प्रमुख मापदंडों को पूरा करना था।
नया नवरत्न दर्जा मिलने से इन कंपनियों को वित्तीय निर्णय लेने में अधिक स्वायत्तता मिलेगी।
डिपार्टमेंट ऑफ पब्लिक एंटरप्राइजेज द्वारा किए गए ऐलानों के मुताबिक, सीपीएसई में नवरत्न का दर्जा पाने वाली आईआरसीटीसी और आईआरएफसी क्रमश: 25वीं और 26वीं कंपनी हैं।
नवरत्न का दर्जा मिलने से दोनों कंपनियों को अधिक वित्तीय स्वायत्तता मिलेगी, जिससे उन्हें सरकार की मंजूरी के बिना 1,000 करोड़ रुपये तक निवेश करने की अनुमति मिलेगी। इससे दोनों कंपनियों को आगे की विकास योजनाओं के लिए निर्णय लेने में तेजी लाने में मदद मिलेगी।
केंद्र सरकार द्वारा सीपीएसई को तीन प्रमुख समूहों: महारत्न, नवरत्न और मिनीरत्न में बांटा गया है। इसके जरिए सरकार का उद्देश्य सरकारी कंपनियों को अधिक प्रतिस्पर्धी और दक्ष बनाना है।
आईआरसीटीसी और आईआरएफसी दोनों रेलवे मंत्रालय के तहत आती हैं। वित्त वर्ष 2023-24 में आईआरसीटीसी का वार्षिक टर्नओवर 4,270.18 करोड़ रुपये था। इस दौरान कंपनी को 1,111.26 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ था। वहीं, कंपनी की नेटवर्थ 3,229.97 करोड़ रुपये थी।
वित्त वर्ष 2023-24 में आईआरएफसी का वार्षिक टर्नओवर 26,644 करोड़ रुपये था। इस दौरान कंपनी को 6,412 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ था। वहीं, कंपनी की नेटवर्थ 49,178 करोड़ रुपये थी।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस उपलब्धि के लिए दोनों कंपनियों की सराहना की।
केंद्रीय मंत्री ने एक्स पर पोस्ट किया, नवरत्न का दर्जा मिलने पर आईआरसीटीसी और आईआरएफसी को बधाई।
इससे पहले सितंबर में सतलुज जल विद्युत निगम लिमिटेड, नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन, सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन और रेलटेल कॉरपोरेशन को नवरत्न का दर्जा दिया गया था। वहीं, जुलाई 2024 में मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड को नवरत्न कंपनियों के समूह में शामिल किया गया था।
नई दिल्ली । भारत की जीडीपी वृद्धि दर वित्त वर्ष 2025-26 में 6.5 प्रतिशत पर रह सकती है। इसके साथ ही मानसून सीजन भी सामान्य रह सकता है, जिसके कारण कमोडिटी की कीमतों में नरमी रहने की उम्मीद है।
क्रिसिल की रिपोर्ट में सोमवार को कहा गया कि निजी खपत में सुधार होने की उम्मीद है। हालांकि, निवेश वृद्धि निजी पूंजीगत व्यय पर निर्भर करेगी।
रिपोर्ट में कहा गया कि कृषि उत्पादन में सुधार और खाद्य महंगाई में कमी की उम्मीद के कारण निजी खपत में और सुधार की उम्मीद है। खाद्य महंगाई में नरमी से घरेलू बजट में विवेकाधीन खर्च के लिए जगह बनेगी।
रिपोर्ट में आगे बताया गया कि केंद्रीय बजट 2025-26 में इनकम टैक्स में बढ़ाई गई छूट से खपत को बढ़ावा मिलेगा।
इसके अतिरिक्त, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा मौद्रिक नीति में ढील देने से भी खपत को बढ़ावा मिलेगा।
क्रिसिल को उम्मीद है कि आरबीआई वित्त वर्ष 2025-26 में रेपो रेट में 50-75 आधार अंक की कटौती कर सकता है।
आधिकारिक आंकड़ों का हवाला देते हुए क्रिसिल की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2024-25 के लिए जीडीपी वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो पिछले वित्त वर्ष की जीडीपी विकास दर 9.2 प्रतिशत से कम है। हालांकि, विकास दर वित्त वर्ष 2011 और 2020 के बीच महामारी से पहले के दशक के औसत 6.6 प्रतिशत के करीब बनी हुई है और इससे भारत को सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था का अपना टैग बरकरार रखने में मदद मिलेगी।
चौथी तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर बढक़र 7.6 प्रतिशत होने की उम्मीद है, जिससे चालू वित्त वर्ष में जीडीपी वृद्धि 6.5 प्रतिशत हो जाएगी। चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर बढक़र 6.2 प्रतिशत हो गई है, जो दूसरी तिमाही की जीडीपी वृद्धि दर 5.6 प्रतिशत से अधिक है।
नई दिल्ली । मार्च के दूसरे कारोबारी दिन शेयर बाजार में गिरावट जारी है। शेयर बाजार खुलते ही पहले तीन मिनटों में सेंसेक्स में 450 से अधिक अंकों की गिरावट दर्ज करते हुए 9 महीनों के निचले स्तर पर पहुँच गया। 3 मिनट में ही निवेशकों के 1.33 लाख करोड़ रुपये डूब गए।सुबह करीब 9.30 बजे, सेंसेक्स 363.22 अंक या 0.50 प्रतिशत की गिरावट के साथ 72,722.72 पर कारोबार कर रहा था, जबकि निफ्टी 125.80 अंक या 0.57 प्रतिशत की गिरावट के साथ 21,993.50 पर कारोबार कर रहा था।
विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा फैलाई गई अनिश्चितता वैश्विक व्यापार में बढ़ रही है। उन्होंने कहा, कनाडा और मैक्सिको पर 25 प्रतिशत टैरिफ और चीन पर 20 प्रतिशत टैरिफ (अब एडिशनल 10 प्रतिशत लगाया गया है) की धमकियां एक्शन में बदल रही हैं। डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए इन टैरिफ का जवाब अभी तक नहीं पता चल पाया है। निश्चित रूप से प्रतिक्रिया होगी। ट्रंप प्रशासन द्वारा टैरिफ हाइक के जवाब में, कनाडा मंगलवार से 30 बिलियन कनाडाई डॉलर के अमेरिकी आयात पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाएगा। यह आने वाले 21 दिनों में 125 बिलियन कनाडाई डॉलर के एडिशनल अमेरिकी आयात पर टैरिफ लगाएगा।
इस बीच, निफ्टी बैंक 91.80 अंक या 0.19 प्रतिशत की गिरावट के साथ 48,022.50 पर था। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 883.50 अंक या 1.84 प्रतिशत की गिरावट के बाद 47,100.65 पर कारोबार कर रहा था। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 251.50 अंक या 1.72 प्रतिशत की गिरावट के बाद 14,409.35 पर था।
बाजार पर नजर रखने वालों के अनुसार, निफ्टी को 22,000 पर तत्काल समर्थन मिला है, इससे पहले 21,850 और 21,600 स्तर पर समर्थन है, जबकि प्रतिरोध 22,500 और इसके बाद 22,600 और 22,800 स्तर पर है। चॉइस ब्रोकिंग के मंदार भोजाने ने कहा, 22,000 से नीचे का ब्रेकडाउन 21,800 की ओर बिक्री दबाव को बढ़ा सकता है, जबकि 22,500 से ऊपर की रिकवरी राहत रैली को ट्रिगर कर सकती है। सूचकांक अभी भी मंदी के दौर में है और ट्रेंड रिवर्सल के लिए निर्णायक ब्रेकआउट की जरूरत है।
मुंबई । मुंबई की एक विशेष अदालत ने पूर्व भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) प्रमुख माधबी पुरी बुच और पांच अन्य व्यक्तियों के खिलाफ शेयर बाजार में कथित धोखाधड़ी और नियामक उल्लंघनों के आरोपों में प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज करने का आदेश दिया है।
विशेष भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) अदालत के न्यायाधीश शशिकांत एकनाथराव बांगड़ ने अपने आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया नियमों के उल्लंघन और मिलीभगत के प्रमाण मौजूद हैं, जिसके लिए एक निष्पक्ष और निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि वह इस जांच की निगरानी करेगी और मामले की स्थिति रिपोर्ट 30 दिनों के भीतर पेश करने का निर्देश दिया है।
यह आदेश शेयर बाजार में कथित अनियमितताओं से जुड़े एक मामले के संदर्भ में आया है, जिसमें माधबी पुरी बुच और अन्य व्यक्तियों पर नियामक प्रावधानों का उल्लंघन करने और धोखाधड़ी में शामिल होने का आरोप है। अदालत के इस आदेश से मामले की औपचारिक जांच का मार्ग प्रशस्त हो गया है और आने वाले दिनों में इस मामले में और अधिक जानकारी सामने आने की उम्मीद है।
नई दिल्ली । पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सोमवार को कहा कि ग्लोबल एनर्जी लैंडस्केप में भारत ने अपनी स्थिति को मजबूत करते हुए तीसरे सबसे बड़े बायोफ्यूल उत्पादक के रूप में अपनी पहचान बनाई है, जो कि स्वच्छ और अक्षय ऊर्जा की ओर बढ़ते कदम को दिखाता है।
केंद्रीय मंत्री ने एक्स सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट में बताया, भारत ने इस साल जनवरी तक पेट्रोल में 19.6 प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंडिंग हासिल कर लिया है और मूल 2030 शेड्यूल से पांच साल पहले ही 20 प्रतिशत हासिल करने की तैयारी है, जिससे ईंधन आयात और उत्सर्जन में कमी आएगी।
आधिकारिक अनुमान के अनुसार, पिछले 10 वर्षों के दौरान इथेनॉल ब्लेंडिंग पहल ने किसानों की आय में वृद्धि की है क्योंकि यह गन्ने से बनाया जाता है, जो ग्रामीण रोजगार में वृद्धि को दर्शाता है। साथ ही 1.75 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर सीओ2 उत्सर्जन में कमी आई है और इसके परिणामस्वरूप 85,000 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है।
सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम, इस प्रयास में सबसे आगे रही हैं, जिन्होंने देश भर में पेट्रोल के साथ इथेनॉल के अलग-अलग ब्लेंड पेश किए हैं।
ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने 131 डेडिकेटेड इथेनॉल प्लांट के साथ समझौते किए हैं। इन प्लांट से 745 करोड़ लीटर की वार्षिक उत्पादन डिजाइन क्षमता जुडऩे की उम्मीद है। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने हाईर ब्लेंडिंग प्रतिशत को संभालने के लिए स्टोरेज कैपेसिटी और इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने में भी निवेश किया है।
केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि ई100 ईंधन अब देश भर में 400 से अधिक आउटलेट पर उपलब्ध है, जो भारत को स्वच्छ, हरित भविष्य के करीब ले जा रहा है। यह प्रगति, इनोवेशन और सस्टेनेबिलिटी की यात्रा है।
पेट्रोलियम मंत्री ने सबसे पहले मार्च 2024 में इंडियन ऑयल के 183 आउटलेट पर इथेनॉल (ई) 100 ईंधन लॉन्च किया। इसकी उच्च-ऑक्टेन रेटिंग के साथ, जो आमतौर पर 100-105 के बीच होती है, इथेनॉल 100 उच्च-प्रदर्शन इंजनों के लिए बेहतर साबित होता है, जो पर्यावरणीय प्रभाव को कम करते हुए बेहतर दक्षता और बिजली उत्पादन सुनिश्चित करता है।
इसके अलावा, इथेनॉल 100 का इस्तेमाल कई तरह के वाहनों में किया जा सकता है, जिसमें गैसोलीन, इथेनॉल या दोनों के किसी भी मिश्रण पर चलने के लिए डिजाइन किए गए फ्लेक्स-फ्यूल वाहन शामिल हैं।
पुरी ने कहा, शांत शहर डिगबोई से दुनिया के टॉप एनर्जी बाजारों तक, भारत की पेट्रोलियम यात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व द्वारा निर्देशित लचीलेपन और प्रगति की कहानी है।
इस संदर्भ में, उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत अब एलएनजी टर्मिनल क्षमता में दुनिया का चौथा सबसे बड़ा देश बन गया है, जो एक स्थिर और सुरक्षित एनर्जी सप्लाई सुनिश्चित करता है।
देश में दुनिया की चौथी सबसे बड़ी वैश्विक रिफाइनिंग क्षमता भी है, जो एक प्रमुख ऊर्जा केंद्र के रूप में इसकी भूमिका को मजबूत करती है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इसने भारत को रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों का 7वां सबसे बड़ा निर्यातक बनने में भी सक्षम बनाया है, जिससे वैश्विक व्यापार और ईंधन सुरक्षा मजबूत हुई है।
अहमदाबाद । अदाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (एजीईएल) ने सोमवार को घोषणा की कि कंपनी ने राजस्थान में भारत के सबसे बड़े सोलर-विंड हाइब्रिड रिन्यूएबल क्लस्टर को बनाने के लिए 1.06 बिलियन डॉलर का रिफाइनेंस किया है, जो कि कंपनी की कैपिटल मैनेजमेंट जर्नी को लेकर एक और मील का पत्थर साबित हुआ है।
भारत की सबसे बड़ी रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी ने 2021 में लिए गए 1.06 बिलियन डॉलर की बकाया राशि के साथ अपनी पहली कंस्ट्रक्शन फैसिलिटी का सफलतापूर्वक रिफाइनेंस किया।
कंपनी ने यह भी बताया कि इसकी निर्माण फैसिलिटी को पुनर्वित्त (रिफाइनेंस) करने के लिए जुटाई गई दीर्घकालिक वित्तपोषण की अवधि 19 साल है, जिसमें अंतर्निहित परिसंपत्ति जीवन के अनुरूप पूरी तरह से परिशोधित ऋण संरचना है।
मजबूत परिचालन प्रदर्शन ट्रैक रिकॉर्ड के आधार पर, कंस्ट्रक्शन फैसिलिटी को तीन घरेलू रेटिंग एजेंसियों द्वारा एए प्लस/स्टेबल रेटिंग दी गई है।
इस सफलता के साथ, एजीईएल ने अंतर्निहित परिसंपत्ति पोर्टफोलियो के लिए अपने कैपिटल मैनेजमेंट कार्यक्रम को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है, जिसमें दीर्घकालिक सुविधाएं हासिल करना शामिल है जो उस पोर्टफोलियो के कैश फ्लो लाइफसाइकल के साथ पूरी तरह से जुड़ी हैं।
इस कार्यक्रम का फ्रेमवर्क पूंजी के विविध स्रोतों तक गहरी पहुंच के माध्यम से महत्वपूर्ण लाभ प्रदान करता है, जिससे लंबी अवधि के साथ बड़ी रकम सुरक्षित होती है।
कंपनी ने कहा, यह अप्रोच न केवल वित्तीय स्थिरता को बढ़ाता है, बल्कि एजीईएल की अपनी विकास गति को जारी रखने और हितधारकों को स्थायी मूल्य सृजन प्रदान करने की क्षमता भी सुनिश्चित करता है।
एजीईएल के पास वर्तमान में 12.2 गीगावाट का ऑपरेटिंग रिन्यूएबल पोर्टफोलियो है, जो देश में सबसे बड़ा है और 12 राज्यों में फैला हुआ है। कंपनी ने भारत के डीकार्बोनाइजेशन लक्ष्यों के अनुरूप 2030 तक 50 गीगावाट हासिल करने का लक्ष्य रखा है।
पिछले सप्ताह, कंपनी ने गुजरात के खावड़ा में दुनिया के सबसे बड़े रिन्यूएबल एनर्जी प्लांट में एडिशनल 275 मेगावाट सौर क्षमता के चालू होने के साथ रिकॉर्ड 12,000 मेगावाट परिचालन पोर्टफोलियो को पार कर लिया।
एजीईएल इस उपलब्धि तक पहुंचने वाली भारत की पहली रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी है। 12,258.1 मेगावाट के पोर्टफोलियो में 8,347.5 मेगावाट सौर, 1,651 मेगावाट पवन और 2,259.6 मेगावाट पवन-सौर हाइब्रिड क्षमता शामिल है।
कंपनी ने अब तक गुजरात के खावड़ा में 2,824.1 मेगावाट रिन्यूएबल एनर्जी की संचयी क्षमता का संचालन किया है।