विज्ञान

21 जून को ही क्यों मनाया जाता है योग दिवस, जानें इतिहास
Posted Date : 20-Jun-2018 11:22:25 pm

21 जून को ही क्यों मनाया जाता है योग दिवस, जानें इतिहास

मतभेदों और विवादों से भरे आज के इस दौर में अगर दुनिया के लगभग सभी देश परस्पर सहमति से किसी एक मुद्दे पर एक साथ एक दूसरे का समर्थन करें तो यह मान लेना चाहिए कि जरूर वह मुद्दा वैश्विक हित से जुड़ा होगा। 21 जून को दुनियाभर में मनाया जाने वाला योग दिवस ऐसा ही एक आयोजन है। भारत में योग को स्वस्थ रहने की लगभग 5000 साल पुरानी मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक पद्धति के रूप में मान्यता प्राप्त है और यह हमारे देश के लोगों की जीवनचर्या का हिस्सा है। 

संयुक्त राष्ट्र महासभा से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आह्वान
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में 27 सितंबर, 2014 को दुनियाभर में योग दिवस मनाने का आह्वान किया था। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की घोषणा भारत के लिए एक महान क्षण था क्योंकि संयुक्त राष्ट्र महासभा ने प्रस्ताव आने के मात्र तीन माह के भीतर इसके आयोजन का ऐलान कर दिया। महासभा ने 11 दिसंबर, 2014 को यह ऐलान किया कि 21 जून का दिन दुनिया में योग दिवस के रूप में मनाया जाएगा। यह दुनियाभर के लोगों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य तथा आध्यात्मिक संतोष के विकास का अनुपम अवसर था। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के आयोजन का दुनिया के लगभग सभी देशों ने समर्थन किया और दुनिया के 170 से ज्यादा देशों के लोग 21 जून को विश्व योग दिवस के रूप में मनाते हैं और योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने का संकल्प लेते हैं। पूरे विश्व में इस दिन योग के फायदों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिये योग प्रशिक्षण शिविर, योग प्रतियोगिता और सामूहिक योगाभ्यास किया जाता है। चूंकि यह दिन दुनियाभर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान पर मनाया जाता है इसलिए वह खुद इस आयोजन में बढ़ चढ़कर हिस्सेदारी निभाते हैं और उन्हीं की अगुवाई में इस दिन के मुख्य कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। 

21 जून को ही क्यों?
21 जून के दिन को विश्व योग दिवस के लिए चुनने की भी एक खास वजह है। दरअसल यह दिन उत्तरी गोलार्द्ध का सबसे लंबा दिन है, जिसे ग्रीष्म संक्रांति भी कह सकते हैं। भारतीय संस्कृति के दृष्टिकोण से, ग्रीष्म संक्रांति के बाद सूर्य दक्षिणायन हो जाता है और सूर्य के दक्षिणायन का समय आध्यात्मिक सिद्धियां प्राप्त करने में बहुत लाभकारी है। 

पहला अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 
21 जून, 2015 को पहला अंतरराष्‍ट्रीय योग दिवस मनाया गया था, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्‍व में 35 हजार से अधिक लोगों और 84 देशों के प्रतिनिधियों ने दिल्‍ली के राजपथ पर योग के 21 आसन किए थे। इस समारोह ने दो गिनेस रेकॉर्ड्स की स्थापना की। सबसे बड़ी योग क्लास 35,985 लोगों के साथ और 84 देशों के लोगों द्वारा इस आयोजन में एक साथ भाग लेने का रेकॉर्ड बना। 

दूसरा योग दिवस 21 जून, 2016 को चंडीगढ़ में मनाया गया, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्‍व में सैकड़ों लोगों ने योग के आसन किए। 2017 में तीसरे अंतरराष्‍ट्रीय योग दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्‍व में लखनऊ में बड़े कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इसमें करीब 51 हजार लोगों ने हिस्‍सा लिया। इस बार का मुख्य योग कार्यक्रम देवभूमि उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में होगा और साल के इस सबसे लंबे दिन लोग अपने जीवन को अधिक से अधिक लंबा और स्वस्थ बनाए रखने का संकल्प लेंगे। 

योग का इतिहास
पूर्व वैदिक काल (2700 ईसा पूर्व) में एवं इसके बाद पतंजलि काल तक योग की मौजूदगी के ऐतिहासिक साक्ष्‍य देखे गए। मुख्‍य स्रोत, जिनसे हम इस अवधि के दौरान योग की प्रथाओं तथा संबंधित साहित्‍य के बारे में सूचना प्राप्‍त करते हैं, वेदों (4), उपनिषदों (18), स्‍मृतियों, बौद्ध धर्म, जैन धर्म, पाणिनी, महाकाव्‍यों (2) के उपदेशों, पुराणों (18) आदि में उपलब्‍ध हैं। 

ऐसा माना जाता है कि जब से सभ्‍यता शुरू हुई है तभी से योग किया जा रहा है। योग के विज्ञान की उत्‍पत्ति हजारों साल पहले हुई थी, पहले धर्मों या आस्‍था के जन्‍म लेने से काफी पहले हुई थी। योग विद्या में शिव को पहले योगी या आदि योगी तथा पहले गुरू या आदि गुरू के रूप में माना जाता है।

डायनासोर पर गलती 10 साल के बच्चे ने पकड़ी
Posted Date : 04-Aug-2017 6:14:30 pm

डायनासोर पर गलती 10 साल के बच्चे ने पकड़ी

लंदन: स्थित नेचुरल हिस्ट्री म्यूजिम देखने पहुंचेए ऑटिज़्म से पीडि़त एक 10 साल के बच्चे ने प्रदर्शित डायनासोर में म्यूजयि़म की एक बड़ी ग़लती पकड़ कर लोगों को चौंका दिया। म्यूजयि़म ने स्वीकार किया है कि 10 साल के बच्चे ने बताया कि एक डायनासोर पर ग़लत लेबल लगाया गया है। एसेक्स इलाके में रहने वाले चार्ली एस्पर्जर सिंड्रोम से ग्रस्त हैं, वो डायनासोर के फैन हैं। इस बीमारी को आमतौर पर ऑटिज़म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर बताया जाता है। जिसमें पीडि़त खुद में खोया रहता है। म्यूजयि़म में अपने परिवार के साथ घूमते हुए चार्ली ने पाया कि डायनासोर की प्रजातियों में से एक के बारे में दी गई जानकारी ग़लत है। हालांकि उसके परिजनों को इस बात पर भरोसा नहीं हुआ कि म्यूजयि़म ने ग़लती की है लेकिन चार्ली ने ये समझाने की पूरी कोशिश की कि जिस चित्र के ज़रिए डायनासोर को दिखाया गया है दरअसल वह दूसरी प्रजाति का है। चार्ली के परिजन अपने दोनों बेटों को लेकर 21 जुलाई को लंदन म्यूजियम गए थे, जब दूसरे बच्चे डायनासोर देखने में व्यस्त थे तब चार्ली ने उनके बारे में पढऩा शुरू किया। डायनासोर की प्रजाति ऑविरैप्टर की ख़ासियत यह थी कि उसकी एक चोंच होती थी और वह पिछले पैरों से चलता था, लेकिन म्यूजयि़म में जो चित्र लगा था उसमें उसे चारों पैरों से चलता दिखाया गया था। चार्ली की मां जैडे ने बीबीसी को बताया कि उसे डायनासोर के बारे में अच्छी जानकारी है।

कॉफी पीने से लंबी हो सकती है आयु!
Posted Date : 15-Jul-2017 5:12:50 pm

कॉफी पीने से लंबी हो सकती है आयु!

एक शोध से पता चला है कि दिन भर में तीन बार कॉफी पीने से आपकी आयु लंबी हो सकती है
यह शोध यूरोप के दस देशों के करीब पांच लाख लोगों पर किया गयाण् यह शोध 35 साल से ज़्यादा उम्र के लोगों पर किया गया। एनाल्स ऑफ इंटरनल मेडिसिन नाम के जर्नल में छपे शोध में कहा गया है कि एक कप अतिरिक्त कॉफी पीने से किसी इंसान की आयु लंबी हो सकती है। भले ही यह कॉफी डिकैफऩिटेड कैफीऩ निकाला गया ही क्यों ना हो। लेकिन कुछ विशेषज्ञों ने शोध के नतीजों पर शंका जाहिर की है, इन विशेषज्ञों का कहना है कि यह दावे के साथ नहीं कहा जा सकता है कि कॉफी की ही वजह से ही ऐसा हुआ है या फिर कॉफी पीने वाले लोगों के स्वस्थ जीवनशैली के कारण। इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर एंड इम्पेरियल कॉलेज लंदन के शोधकर्ताओं का कहना है कि अधिक कॉफी पीने का ताल्लुक दिल और आंत की बीमारी से मरने का जोखि़म कम होने से है। यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैम्ब्रिज के प्रोफेसर सर डेविड स्पीगलहालटर का कहना है कि अगर कॉफी की वजह से मृत्यु की दर में कमी का आकलन किया जाए तो एक अतिरिक्त कप कॉफी हर दिन पीने से मर्दों की उम्र तीन महीने ज़्यादा हो सकती है, जबकि औरतों की आयु औसतन एक महीने बढ़ जाती है। हालांकि यह शोध बहुत बिलकुल सही तरीके से किया गया है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इसमें कोई चूक ना हुई हो, यह शोध ये भी नहीं बता सकता कि कॉफी के अंदर ऐसा क्या जादुई तत्व है, जिससे आयु बढ़ सकती है।

 

हैकरों का ब्रिटेन में सांसदों पर नया हमला, पासवर्ड का खुलासा करने के लिए जाल में फंसाने की कोशिश
Posted Date : 07-Jul-2017 3:46:38 pm

हैकरों का ब्रिटेन में सांसदों पर नया हमला, पासवर्ड का खुलासा करने के लिए जाल में फंसाने की कोशिश

लंदन: ब्रिटेन की संसद नए सिरे से साइबर हमले की निशाना बनी है जब हैकरों ने सांसदों को उनके पासवर्ड का खुलासा करने के लिए अपने जाल में फंसाने की कोशिश की, अधिकारियों ने सांसदों और उनके सहायकों से कहा है कि वे इस तरह के खतरों से सावधान रहें, नेताओं को आगाह किया गया है कि हैकर खुद को संसदीय अधिकारी बताकर उनके पासवर्ड जानने की कोशिश कर सकते हैं, सांसदों और उनके कर्मचारियों को भेजे गए चेतावनी संदेश में कहा गया है, इस दोपहर में हमें पता चला कि संसद से जुड़े लोगों को फोन किया जा रहा है और उनके यूजरनेम और पासवर्ड पूछा जा रहा है। समाचार पत्र द संडे टेलीग्राफ के अनुसार संदेश में कहा गया है, फोन करने वाले लोग यूजर्स को यह सूचना दे रहे हैं कि उनको डिजिटल सेवा की तरफ से लगाया गया है कि साइबर हमले से मदद की जाए, ये फोन कॉल डिजिटल सेवा के नहीं हैं, हम कभी से पासवर्ड बताने के लिए नहीं कहेंगे। संसदीय अधिकारियों ने कहा कि पिछले सप्ताह 12 घंटे तक के हमले के बाद हैकरों ने फिर से निशाना बनाने का प्रयास किया है।

स्विच ऑफ रहने पर भी दिमाग भटकाते हैं स्मार्टफोन
Posted Date : 07-Jul-2017 3:45:32 pm

स्विच ऑफ रहने पर भी दिमाग भटकाते हैं स्मार्टफोन

एक नई स्टडी में खुलासा हुआ है कि स्मार्टफोन की उपस्थिति ब्रेन की संज्ञान लेने की क्षमता पर प्रतिकूल असर डालती है जिससे ब्रेन की डेटा प्रोसेस करने की शक्ति भी कम हो जाती है। अगर स्मार्टफोन आपके बेहद नजदीक या पहुंच में हैं तो स्विच ऑफ मोड में रहने पर भी यह हमारे दिमाग पर प्रतिकूल असर डालता है। यूएस की यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सस के मेककॉम्ब स्कूल ऑफ बिजनस की रिसर्च में यह खुलासा हुआ है। इस रिसर्च में यह नतीजा भी सामने आया है कि दिन-प्रतिदिन इंसान, स्मार्टफोन पर जितना ज्यादा निर्भर होता जा रहा है उससे इंसान की समस्याएं बढ़ रही हैं और वह अस्वस्थ हो रहा है। रिसर्च की रिपोर्ट में कहा गया है, दो अलग अलग प्रयोगों से निकले निकर्ष इस बात का संकेत देते हैं कि अगर कोई व्यक्ति बार-बार अपना फोन चेक नहीं करता उसके बावजूद भी सिर्फ इस डिवाइस की मौजूदगी भर से ही व्यक्ति के ब्रेन की संज्ञान लेने की क्षमता कम हो जाती है। पहले प्रयोग में 520 लोगों से कहा गया कि वे अपना स्मार्टफोन साइलंट मोड पर कर दें और उसे अपने डेस्क पर फेसडाउन करके या फिर अपने पॉकेट या बैग में या किसी दूसरे कमरे में रख दें। उसके बाद उन लोगों को कुछ टेस्ट पूरे करने को कहा गया जिसका मकसद उनकी संज्ञान लेने की क्षमता का आकलन करना था। शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन प्रतिभागियों ने अपने स्मार्टफोन को दूसरे कमरे में रख दिया था उन्होंने टेस्ट के दौरान उन लोगों के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया जिन्होंने अपने फोन को फेसडाउन कर अपने डेस्क पर रखा था। वहीं दूसरे प्रयोग में 275 लोगों से कहा गया कि वे अपने फोन को साइलंट मोड पर या पूरी तरह से स्विच ऑफ कर दें और उसके बाद स्मार्टफोन को फेसडाउन कर डेस्क पर, पॉकेट या बैग में या दूसरे कमरे में रख दें। इन लोगों को कुछ टास्क पूरे करने थे। साथ ही उनसे कुछ सवाल भी पूछे गए यह जानने के लिए कि वे अपने स्मार्टफोन पर कितना ज्यादा निर्भर हैं। शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन लोगों ने कहा कि वे अपने स्मार्टफोन पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं उन्होंने इस टेस्ट के दौरान सबसे खराब प्रदर्शन किया। इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ा कि उनका स्मार्टफोन स्विच ऑफ था या साइलंट और वह उनके डेस्क पर था, पॉकेट में या फिर बैग में।

ग़ैरकानूनी सामग्रियों को समय से न हटाने पर सोशल मीडिया कंपनियों को जर्मनी में 5 करोड़ यूरो, कऱीब 370 करोड़ रुपये, का जुर्माना भरना पड़ सकता है
Posted Date : 02-Jul-2017 4:04:59 pm

ग़ैरकानूनी सामग्रियों को समय से न हटाने पर सोशल मीडिया कंपनियों को जर्मनी में 5 करोड़ यूरो, कऱीब 370 करोड़ रुपये, का जुर्माना भरना पड़ सकता है

अक्टूबर से जर्मनी में फेसबुक, यूट्यूब और 20 लाख यूजऱ वाली अन्य वेबसाइटों को नफऱत फैलाने या अन्य आपराधिक सामग्री को 24 घंटे के अंदर अपने प्लेटफार्म से हटाना अनिवार्य हो जाएगा। पोस्ट की गई सामग्री ग़ैरकानूनी नहीं है, उसके बारे में सात दिन के अंदर कंपनियों को मूल्यांकन करना होगा, यह अपनी तरह का दुनिया का सबसे कड़ा क़ानून है। अगर कंपनी इस क़ानून को लागू करने में असफल होती है तो उस पर 50 लाख यूरो का ज़ुर्माना लगेगा और अपराध की गंभीरता के आधार पर इसे पांच करोड़ यूरो तक बढ़ाया जा सकता है। फ़ेसबुक ने एक बयान जारी कर कहा है कि वो नफऱत फैलाने वाली सामग्रियों को रोकने के लिए जर्मन सरकार के साथ मिल कर काम करती रही है, लंबी बहस के बाद नेट्सडीजी नामक इस क़ानून को जर्मन संसद ने पास कर दिया है। हालांकि मानवाधिकार संगठनों और उद्योग प्रतिनिधियों ने इसकी आलोचना की है। यह क़ानून सितंबर में होने जा रहे जर्मनी के आम चुनावों के पहले लागू नहीं हो पाएगा। कानून मंत्री हीको मास ने फेसबुक का का नाम लेते हुए कहा कि अनुभव बताता है कि बिना राजनीतिक दबाव के बड़े सोशल मीडिया ऑपरेटर ग़ैरकानूनी सामग्रियों को हटाने में अपने कर्तव्यों का ठीक से पालन नहीं करते।