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शेयर बाजार निवेशकों को विशेषज्ञ की राय, ‘दीर्घावधि अवसर पर ध्यान देने का यही सही समय
Posted Date : 02-Mar-2025 7:34:08 am

शेयर बाजार निवेशकों को विशेषज्ञ की राय, ‘दीर्घावधि अवसर पर ध्यान देने का यही सही समय

नई दिल्ली । बाजार पर नजर रखने वालों के अनुसार, शॉर्ट-टर्म बिकवाली के बावजूद, मजबूत मैक्रो फंडामेंटल, आय वृद्धि और आकर्षक वैल्यूएशन ने मिलकर निवेशकों के लिए तात्कालिक अस्थिरता के बजाय दीर्घावधि अवसर पर ध्यान केंद्रित करने के लिए मौजूदा समय को महत्वपूर्ण बना दिया है।
मैक्रो फ्रंट पर स्थितियां स्थिर बनी हुई हैं। राजकोषीय घाटा नियंत्रण में है, साथ ही कर कटौती से खपत बढऩे की उम्मीद है। मुद्रास्फीति 4.31 प्रतिशत पर कम है और ब्याज दरों में कटौती शुरू हो गई है, जिससे आर्थिक विकास को समर्थन मिलना चाहिए।
कैपिटलमाइंड रिसर्च में कृष्णा अप्पाला ने कहा, घरेलू निवेशक म्यूचुअल फंड में लगातार पैसा लगा रहे हैं, जिससे विदेशी बिकवाली के दबाव को कुछ हद तक कम किया जा सकता है। हालांकि बाजार के सटीक निचले स्तर को जान पाना मुश्किल है, लेकिन बहुत ज्यादा नेगेटिविटी अक्सर एक महत्वपूर्ण मोड़ का संकेत देती है।
वित्त वर्ष 2024-25 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) में जीडीपी वृद्धि दर बढक़र 6.2 प्रतिशत हो गई, जबकि वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में संशोधित आंकड़ा 5.6 प्रतिशत था।
वित्त वर्ष 2024-25 के लिए जीडीपी वृद्धि दर अब 6.5 प्रतिशत अनुमानित है, जबकि 2023-24 के लिए आर्थिक विकास दर को संशोधित कर 8.2 प्रतिशत कर दिया गया है, जो 12 साल का उच्चतम स्तर है।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत के वित्त वर्ष 2025 की तीसरी तिमाही के जीडीपी डेटा ने उम्मीदों को पूरा किया, जिसमें वित्त वर्ष के लिए मामूली संशोधन कर 6.5 प्रतिशत कर दिया गया।
कृषि क्षेत्र ने तीसरी तिमाही में स्थिर वृद्धि दर्ज की, जो खरीफ फसल में संभावित सुधार का संकेत देती है, जो ग्रामीण खपत को बढ़ावा दे सकती है।
जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, निवेशक प्रमुख आगामी घटनाओं जैसे टैरिफ पॉलिसी, यूएस कोर पीसीई प्राइस इंडेक्स और जॉबलेस दावों पर बारीकी से नजऱ रखेंगे। निकट भविष्य में बाजार की स्थिति कमजोर रहने की उम्मीद है, जिसमें वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही से आय में सुधार और वैश्विक व्यापार नीति अनिश्चितताओं के कम होने के साथ धीरे-धीरे सुधार की उम्मीद है।
विशेषज्ञों ने कहा कि बाजार हमेशा एक ही दिशा में नहीं चलते हैं।
इस बीच, मॉर्गन स्टेनली की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अनुकूल राजकोषीय नीति जो पूंजीगत व्यय और उपभोग दोनों को सपोर्ट करती है और सभी लीवरों (रेट्स, लिक्विडिटी, रेगुलेशन, मजबूत सर्विस निर्यात) में आसान मौद्रिक नीति भारत के लिए विकास की गति को बढ़ाने में मददगार होगी।

 

देश की प्रमुख इंडस्ट्रीज की वृद्धि दर जनवरी में 4.6 प्रतिशत रही
Posted Date : 02-Mar-2025 7:33:38 am

देश की प्रमुख इंडस्ट्रीज की वृद्धि दर जनवरी में 4.6 प्रतिशत रही

नई दिल्ली ।  देश की आठ प्रमुख इंडस्ट्रीज के संयुक्त सूचकांक में सालाना आधार पर जनवरी 2025 में 4.6 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा शुक्रवार को जारी किए गए आंकड़ों में यह जानकारी दी गई।
आंकड़ों के मुताबिक, सीमेंट, रिफाइनरी उत्पादों, कोयला, स्टील, फर्टिलाइजर और इलेक्ट्रिसिटी में साकारात्मक वृद्धि देखी गई है।
इन आठ मुख्य इंडस्ट्री की औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) में हिस्सेदारी 40.27 प्रतिशत है।
चालू वित्त वर्ष के अप्रैल से जनवरी की अवधि में आठ प्रमुख इंडस्ट्रीज के संयुक्त सूचकांक की संचयी वृद्धि दर पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 4.4 प्रतिशत पर रही है।
जनवरी में कोयला उत्पादन पिछले वर्ष के इसी महीने की तुलना में 4.6 प्रतिशत बढ़ गया, जबकि इसका संचयी सूचकांक अप्रैल से जनवरी 2024-25 तक पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 6 प्रतिशत बढ़ा है।
पेट्रोलियम रिफाइनरी उत्पादन, जिसका सूचकांक में भार 28.04 प्रतिशत है, जनवरी 2025 में जनवरी 2024 की तुलना में 8.3 प्रतिशत बढ़ गया है। इसका संचयी सूचकांक अप्रैल से जनवरी 2024-25 तक पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 3.3 प्रतिशत बढ़ गया है।
जनवरी 2025 में फर्टिलाइजर उत्पादन में जनवरी 2024 की तुलना में 3 प्रतिशत की वृद्धि हुई क्योंकि इस वर्ष बेहतर मानसून के कारण रबी की बुआई में तेजी आई है।
स्टील उत्पादन, जिसका सूचकांक में भार 17.92 प्रतिशत है, जनवरी 2025 में जनवरी 2024 की तुलना में 3.7 प्रतिशत बढ़ गया। इसका संचयी सूचकांक अप्रैल से जनवरी 2024-25 तक पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 5.9 प्रतिशत बढ़ गया है।
सीमेंट उत्पादन, जिसका सूचकांक में भार 5.37 प्रतिशत है, जनवरी 2025 में जनवरी 2024 की तुलना में 14.5 प्रतिशत बढ़ गया। इसके संचयी सूचकांक में अप्रैल से जनवरी 2024-25 तक पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 4.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
बिजली उत्पादन, जिसका सूचकांक में भार 19.85 प्रतिशत है, जनवरी 2025 में जनवरी 2024 की तुलना में 1.3 प्रतिशत बढ़ गया, जबकि इसके संचयी सूचकांक में अप्रैल से जनवरी 2024-25 तक पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 5 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
हालांकि, कच्चे तेल और नेचुरल गैस के उत्पादन में इस महीने कमी दर्ज की गई है।

 

एफआईआई नहीं, घरेलू निवेशक तय करेंगे भारत का भविष्य : पीयूष गोयल
Posted Date : 02-Mar-2025 7:33:01 am

एफआईआई नहीं, घरेलू निवेशक तय करेंगे भारत का भविष्य : पीयूष गोयल

मुंबई ।  केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने हाल ही में कहा कि भारत का भविष्य विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) नहीं, बल्कि घरेलू निवेशक तय करेंगे। उन्होंने इंडस्ट्री से छोटे निवेशकों के हितों की सुरक्षा करने और बाजार में उतार-चढ़ाव को कम करने का आग्रह किया।
केंद्रीय मंत्री गोयल ने जोर देकर कहा कि म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में प्रबंधन के तहत परिसंपत्तियां (एयूएम) करीब 70 लाख करोड़ रुपये हैं और जल्द ही 100 लाख करोड़ रुपये हो जाएंगी, जो बाजार पर हावी होंगी।
एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एएमएफआई) समिट 2025 में अपने संबोधन के दौरान गोयल ने कहा कि म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री ने वित्तीय साक्षरता को प्रोत्साहित किया है और उद्योग और निवेशकों तक नए वित्तीय विचारों को पहुंचाकर भारत की विकास गाथा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
केंद्रीय मंत्री ने कोविड के बाद एफआईआई द्वारा पैदा की गई कमी को पूरा करने के लिए घरेलू निवेशकों की सराहना की।
केंद्रीय मंत्री गोयल ने उपस्थित लोगों से कहा, घरेलू निवेशकों के साथ-साथ एसआईपी जैसे निवेश के तरीकों ने बाजार को सहारा दिया। उन्होंने देश के हर हिस्से में वित्तीय जागरूकता और वित्तीय उत्पादों को फैलाने में मदद की।
बड़े पैमाने पर फंड का प्रवाह और निवेशकों के बीच आकर्षक शेयरों को खोने का डर राइटसाइजिंग के दौरान निवेशकों के बीच संकट लेकर आया।
गोयल ने कहा कि बाजार की एकतरफा राह पर चलने की कभी न खत्म होने वाली क्षमता के बारे में बहुत सारी गलत सूचनाएं जारी हुई हैं। उन्होंने शेयर बाजार की अनिश्चितता को इंडस्ट्री और उसके छोटे निवेशकों के लिए एक वेक-अप कॉल बताया।
उन्होंने जोर देकर कहा कि एएमएफआई को भी गुमराह निवेशकों को बाकी लोगों से अलग कर अपने कर्तव्यों के प्रति सचेत होना चाहिए।
हाल की उथल-पुथल के दौरान भी हिम्मत वाली कंपनियों ने शेयर बाजार में उचित मूल्य बनाए रखा है।
गोयल ने कहा, बाजार के प्रति इंडस्ट्री के कर्तव्य और जिम्मेदारियां निवेशकों को अल्पावधि में मिलने वाले लाभदायक रिटर्न से कहीं अधिक हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी खर्च और निजी पूंजीगत व्यय में वापसी के संकेत मिल रहे हैं। म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री की अपने निवेशकों के प्रति जिम्मेदारियों के बारे में विस्तार से बताते हुए मंत्री ने प्रतिभागियों से निवेशकों को जोखिम लेने से सावधान करने में अधिक सतर्क रहने का आग्रह किया।
केंद्रीय मंत्री गोयल ने उम्मीद जताई कि इस तरह की पहल अगले 22 वर्षों के लिए भारत की विकास गाथा को गति देने में मददगार होगी।

 

सेविंग अकाउंट के इन नियमों को ना करें इग्नोर, वरना भरनी होगी भारी पेनाल्टी
Posted Date : 01-Mar-2025 7:56:01 am

सेविंग अकाउंट के इन नियमों को ना करें इग्नोर, वरना भरनी होगी भारी पेनाल्टी

नई दिल्ली । क्या आप जानते हैं कि बचत खातों में नकद जमा और निकासी के संबंध में आयकर विभाग द्वारा कुछ विशेष नियम बनाए गए हैं? अगर इन नियमों का पालन नहीं किया जाता है, तो आपको दंड का सामना करना पड़ सकता है या अधिकारियों द्वारा पूछताछ भी की जा सकती है. किसी भी अनजाने में हुई गलतियों से बचने के लिए इन नियमों को समझना आवश्यक है.
अगर आपके पास बचत खाता है, तो यह यूपीआई जैसे डिजिटल लेन-देन से जुड़ा हुआ है. हालांकि इन खातों में नकद जमा और निकासी की अनुमति है. लेकिन उच्च-मूल्य वाले नकद लेन-देन की निगरानी के लिए आयकर अधिनियम के तहत सीमाएं और शर्तें निर्धारित की गई हैं. इन नियमों का उद्देश्य मनी लॉन्ड्रिंग, कर चोरी और अन्य अवैध वित्तीय गतिविधियों को रोकना है.
यदि आप एक वित्तीय वर्ष में 10 लाख रुपये या उससे अधिक जमा करते हैं, तो लेन-देन की सूचना आयकर विभाग को दी जानी चाहिए. यह रिपोर्टिंग अधिकारियों को संदिग्ध गतिविधियों का पता लगाने के लिए बड़े नकदी प्रवाह को ट्रैक करने में मदद करती है.
चालू खातों के लिए, सीमा अधिक है, एक वित्तीय वर्ष में 50 लाख रुपये से अधिक जमा करने पर आयकर विभाग को रिपोर्ट करना आवश्यक है. हालांकि इन जमाओं पर तुरंत कर नहीं लगता है, लेकिन वित्तीय संस्थानों को इन सीमाओं से ऊपर के लेन-देन की रिपोर्ट करना कानूनी रूप से बाध्य है.
अगर आप एक वित्तीय वर्ष में अपने बचत खाते से 1 करोड़ रुपये से अधिक निकालते हैं, तो 2 फीसदी टीडीएस (स्रोत पर कर कटौती) लागू होगा.
अगर आपने पिछले तीन वर्षों से आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल नहीं किया है, तो टीडीएस दर सख्त है.
20 लाख रुपये से अधिक की निकासी पर 2 फीसदी टीडीएस लागू होता है, और 1 करोड़ रुपये या उससे अधिक की निकासी के लिए, टीडीएस दर बढक़र 5 फीसदी हो जाती है.
आयकर अधिनियम की धारा 269एसटी के तहत, एक वित्तीय वर्ष में 2 लाख रुपये या उससे अधिक की नकद राशि जमा करने पर जुर्माना लग सकता है.
हालांकि, यह नियम केवल नकद जमाराशि पर लागू होता है. नकद निकासी, उच्च राशि के लिए टीडीएस के अधीन होते हुए भी इस धारा के तहत दंड नहीं लगाती है.
ये दिशा-निर्देश भारत में नकद लेनदेन की निगरानी और विनियमन करने, पारदर्शिता सुनिश्चित करने और कर चोरी जैसी अवैध गतिविधियों को हतोत्साहित करने के सरकार के प्रयास का हिस्सा हैं.

 

भारत का मजबूत प्रदर्शन 2047 तक विकसित अर्थव्यवस्था बनने के लिए सुधारों को लागू करने का दे रहा अवसर: आईएमएफ
Posted Date : 01-Mar-2025 7:55:41 am

भारत का मजबूत प्रदर्शन 2047 तक विकसित अर्थव्यवस्था बनने के लिए सुधारों को लागू करने का दे रहा अवसर: आईएमएफ

संयुक्त राष्ट्र । भारत की विवेकपूर्ण नीतियों की सराहना करते हुए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के कार्यकारी बोर्ड ने कहा है कि देश का मजबूत आर्थिक प्रदर्शन 2047 तक विकसित अर्थव्यवस्था बनने के लिए महत्वपूर्ण सुधारों को अपनाने में मदद कर सकता है।
आईएमएफ द्वारा जारी की गई रिपोर्ट में कहा गया, भारत का मजबूत आर्थिक प्रदर्शन 2047 तक विकसित अर्थव्यवस्था का दर्जा हासिल करने के लिए जरूरी अहम और चुनौतीपूर्ण संरचनात्मक सुधारों को लागू करने में मदद कर सकता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए आजादी के सौ साल पूरे होने की समय सीमा तय की है।
रिपोर्ट में आईएमएफ के कार्यकारी निदेशकों ने भारतीय अधिकारियों की विवेकपूर्ण व्यापक आर्थिक नीतियों और सुधारों की सराहना की, जिन्होंने भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और एक बार फिर सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बनाने में योगदान दिया है।
रिपोर्ट में बताया गया कि भारत के वित्तीय क्षेत्र का स्वास्थ्य, मजबूत कॉरपोरेट बैलेंसशीट और अच्छा डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर दर्शाता है कि देश की वृद्धि दर मध्यम अवधि में तेज रहेगी। साथ ही जनकल्याण की योजनाएं भी जारी रहेंगी।
रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया कि भू-आर्थिक विखंडन और धीमी घरेलू मांग से उत्पन्न प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करते हुए, व्यापक आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए उचित नीतियां जारी रखना आवश्यक है।
इसके अलावा, रिपोर्ट में भारत द्वारा हाल ही में घटाए गए टैरिफ का भी स्वागत किया गया है। इससे देश की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी।
पिछले महीने पेश किए गए बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ऑटोमोबाइल से लेकर शराब तक कई प्रकार के आयात पर टैरिफ कम कर दिया था।
आईएमएफ के कार्यकारी बोर्ड ने कहा कि संरचनात्मक सुधार देश में उच्च-गुणवत्ता की नौकरियां पैदा करने और निवेश के लिए काफी जरूरी हैं।
रिपोर्ट में आगे कहा गया कि भारत को लेबर मार्केट सुधारों को लागू करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए और महिला भागीदारी को लेबर फोर्स में बढ़ाना चाहिए।

 

होली से पहले जनता को झटका, गैस सिलेंडर के दाम में वृद्धि
Posted Date : 01-Mar-2025 7:55:23 am

होली से पहले जनता को झटका, गैस सिलेंडर के दाम में वृद्धि

नईदिल्ली । सरकारी तेल कंपनियों ने जनता को झटका दिया है. हर महीने की तरह शनिवार को कंपनियों ने एलपीजी सिलेंडर के दाम अपडेट कर दिए हैं. जो आज से लागू हो गए हैं. जानकारी के मुताबिक 19 किग्रा. वाले कमर्शियल गैस सिलेंडर के दामों में वृद्धि की है. बता दें, होली से पहले कंपनियों ने 6 रुपये की बढ़ोत्तरी की है. घरेलू गैस सिलेंडर के दाम में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है.
देश के चारों महानगरों दिल्ली, कोलकाता, मुंबई और चेन्नई तक 19 किग्रा. वाले कमर्शियल गैस सिलेंडर के दामों में 6 रुपये तक की वृद्धि हुई है. अगर तेल कंपनी इंडियन ऑयल की वेबसाइट पर एक नजर डालें तो साल 2023 में सबसे ज्यादा 352 रुपये की वृद्धि हुई थी. पिछले महीने की बात करें तो फरवरी में 7 रुपये की कटौती की गई थी.
सरकारी तेल कंपनियों की वेबसाइट के मुताबिक राजधानी दिल्ली में 19 किग्रा. वाले कमर्शियल सिलेंडल के नए दाम 1803 रुपये हो गए हैं. पिछले महीने तक यही सिलेंडर 1797 रुपये में उपलब्ध था. वहीं, मायानगरी मुंबई में यही सिलेंडर 1755.50 रुपये में बिक रहा है. फरवरी में यही 19 किग्रा. वाला सिलेंडर 1749.50 रुपये में मिलता था. कोलकाता की बात करें तो यह सिलेंडर 1913 रुपये का हो गया है, जो पहले 1907 रुपये में था. चेन्नई की बात करें तो कमर्शियल गैस सिलेंडर के नए दाम 1965.50 रुपये हो गए हैं, जो पहले 1959 रुपये का था.
सरकारी तेल कंपनियों ने 14 किग्रा. वाले घरेलू गैस सिलेंडर के दामों में कोई परिवर्तन नहीं किया है. उसके दाम पिछले साल अगस्त से नहीं बदले हैं. दिल्ली में यह सिलेंडर करीब 903 रुपये में बिक रहा है. मुंबई में इसकी कीमत 802.50 रुपये है. कोलकाता में यही सिलेंडर 829 रुपये में बेचा जा रहा है. वही, चेन्नई में 818.50 रुपये में बिक रहा है.