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 विकास एवं अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने के लिए सरकार तत्पर-सीतारमण
Posted Date : 19-Dec-2020 11:25:18 am

विकास एवं अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने के लिए सरकार तत्पर-सीतारमण

नयी दिल्ली । देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारण ने वादा किया कि इस बार का बजट ''अभूतपूर्व होगा, क्योंकि सरकार महामारी से पीडि़त अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने और विकास को गति देने के लिए तत्पर है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य, चिकित्सा अनुसंधान और विकास (आरएंडडी) में निवेश तथा टेलीमेडिसिन के लिए व्यापक कौशल का विकास महत्वपूर्ण साबित होने जा रहा है। इसके साथ ही आजीविका संबंधी चुनौतियों को व्यावसायिक प्रशिक्षण और कौशल विकास के नए परिप्रेक्ष्य में देखना होगा। सीतारमण ने सीआईआई द्वारा आयोजित के एक कार्यक्रम में कहा, ''मुझे अपने सुझाव भेजिए ताकि हम एक ऐसा बजट बना सकें, जैसा इससे पहले कभी नहीं आया। भारत के 100 वर्षों में ऐसा बजट नहीं देखा गया होगा, जैसा कि महामारी के बाद आएगा। उन्होंने सीआईआई साझेदारी सम्मेलन 2020 को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए संबोधित करते हुए कहा, ''...और यह तब तक संभव नहीं होगा, जब तक मुझे आपके सुझाव और इच्छाओं की सूची नहीं मिल जाती है, इन चुनौतियों से जो बातें आपके विचार में आईं हों, उसका स्पष्ट अवलोकन... इसके बिना, मेरे लिए ऐसा दस्तावेज तैयार करना असंभव है, जो एक अभूतपूर्व बजट हो, एक बजट जिसे महामारी के बाद बनाया जा रहा है। वित्त वर्ष 2021-22 का आम बजट संसद में एक फरवरी 2021 को पेश किया जाना है। वित्त मंत्री ने कहा कि वृद्धि को पटरी पर लाने के लिए उन क्षेत्रों के लिए समर्थन बढ़ाना चाहिए, जो कोविड-19 महामारी के चलते बुरी तरह प्रभावित हुए हैं और साथ ही ऐस क्षेत्र जो आगे वृद्धि के वाहक बन सकते हैं।  उन्होंने कहा, ''हमारे आकार, जनसंख्या और क्षमता को ध्यान में रखते हुए कि भारत अर्थव्यवस्था की अच्छी वृद्धि के लिए मुझे यह कहने में संकोच नहीं है कि हम कुछ अन्य देशों के साथ ही वैश्विक वृद्धि के वाहक भी होंगे। वैश्विक आर्थिक पुनरुत्थान हमारा महत्वपूर्ण योगदान होगा। उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचे के लिए अधिक वित्त मुहैया कराने के साथ ही भवनों और अस्पतालों के लिए निजी साझेदारी मुहैया कराना महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि टेलीमेडिसिन को समझने के लिए व्यापक कौशल की जररूत होगी। उन्होंने यह भी कहा कि आजीविका एक बड़ी चुनौती है और इस मामले में उद्योग जगत को अपनी राय देनी ही चाहिए।

जीएसटी रिटर्न दाखिल करने में अतिरिक्त टीडीएस का दावा करना न भूलें
Posted Date : 19-Dec-2020 11:24:41 am

जीएसटी रिटर्न दाखिल करने में अतिरिक्त टीडीएस का दावा करना न भूलें

नई दिल्ली । वित्त वर्ष 2019-20 के लिए आयरकर रिटर्न दाखिल करने की आखिरी तारीख 31 दिसंबर में अब कुछ ही दिन बाकी हैं। ऐसे में अगर आप अपना रिटर्न भरने जा रहे हैं तो अतिरिक्त टीडीएस कटौती हुई है तो दावा करना नहीं भूलें। स्रोत पर कर कटौती यानी टीडीएस भुगतान या जमा जो भी पहले हो उस समय काटा जाता है। कई दफ ा ऐसा होता है कि करदाता से वास्तविक करदेयता से अधिक टीडीएस की कटौती हो जाती है। कर विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी स्थिति में अतिरिक्त टीडीएस कटौती को पाने के लिए आयकर रिटर्न भरना जरूरी होता है। आयकर विभाग स्वत: अतिरिक्त टीडीएस कटौती को वापस नहीं करता है। अगर किसी व्यक्ति ने 50 लाख रुपये की प्रॉपर्टी बिक्री की तो आयकर के नियम के मुताबिक खरीदने वाले के लिए यह जरूरी है कि वह एक फीसदी उसपर टीडीएस काटकर जमा करें। प्रॉपर्टी खरीदने वाले को 26क्यूबी फॉर्म भरकर टीडीएस कटौती जमा करना होता है। उसके बाद उसे बेचने वाले को फॉर्म 16बी देना होता है। अगर बिक्रेता टीडीएस कटौती का दावा करना चाहता है तो उसे फॉर्म 16बी होना जरूरी होगा। ऐसे कई आय हैं जिन पर टीडीएस की कटौती आयकर अधिनियम के तहत लागू होता है जैसे वेतन आय, ब्याज आय, कुछ व्यक्तियों द्वारा किराए का भुगतान आदि। फ ॉर्म 26एएस आपका सालाना टैक्स स्टेटमेंट है। आप अपने पैन नंबर की मदद से इसे आयकर विभाग की वेबसाइट से डाउनलोड सकते हैं। अगर आपने अपनी आमदनी पर टैक्स चुकाया है या आपको हुई कमाई पर किसी व्यक्ति/संस्था ने टैक्स काटा है तो उसका जिक्र भी आपको फ ॉर्म 26एएस में मिल जाता है। फ ॉर्म 26एएस में न सिर्फ आपके सरकार को चुकाए गए कर की जानकारी होती है, बल्कि अगर आपने अधिक टैक्स चुका दिया है और आप उसका रिफंड फाइल करना चाहते हैं तो इस बारे में भी उसमें जिक्र होता है। अगर आपको किसी वित्त वर्ष में आयकर रिफंड मिला है तो इसमें उसका भी विवरण होता है। टीडीएस की कटौती पेमेंट या क्रेडिट जो पहले होता उसपर की जाती है। अगर आपको अगले वित्तीय वर्ष के लिए अग्रिम आय होती है तो उसपर भी टीडीएस की कटौती होती है। हालांकि, आयकर के नियम के तहत एक ही वित्त वर्ष के लिए टीडीएस कटौती का दावा किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में अग्रिम आय पर टीडीएस कटौती अगले वित्त वर्ष के लिए आगे बढ़ जाता है। करदाता अगले वित्त वर्ष में रिटर्न भरते समय टीडीएस कटौती का दावा कर सकता है। आयकर रिटर्न फ ॉर्म में बिना दावे के टैक्स डिडक्शन ऐट सोर्स (डीटीएस) और टैक्स कलेक्शन ऐट सोर्स (टीसीएस) के लिए दो कॉलम दिए गए हैं। करदाता इन कॉलमों में विवरण इनपुट कर सकते हैं।

भारत में इस्पात क्षेत्र के विकास में आएगी तेजी
Posted Date : 19-Dec-2020 11:24:14 am

भारत में इस्पात क्षेत्र के विकास में आएगी तेजी

नई दिल्ली। केंद्रीय इस्पात मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि सेल के पश्चिम बंगाल में स्थित इस्पात संयंत्र सरकार के मिशन पूर्वोदय के उद्देश्यों को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इस्पात मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान के मुताबिक उन्होंने पश्चिम बंगाल में भारतीय इस्पात प्राधिकरण लिमिटेड (सेल) के आईआईएससीओ इस्पात संयंत्र (आईएसपी) और दुर्गापुर इस्पात संयंत्र (डीएसपी) के प्रदर्शन की समीक्षा के दौरान यह बात कही। बयान में कहा कि मिशन पूर्वोदय में देश के पूर्वी हिस्से में स्थित सेल के संयंत्रों की भूमिका को रेखांकित करते हुए प्रधान ने कहा कि दोनों संयंत्रों को पूर्वी क्षेत्र और देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है।ÓÓ मिशन पूर्वोदय की शुरुआत प्रधान ने जनवरी 2020 में की थी, जिसका उद्देश्य एक एकीकृत इस्पात केंद्र के जरिए पूर्वोत्तर के विकास को गति देना है।

बर्गर किंग पर दूसरे दिन लगा लोअर सर्किट, 47000 के पार सेंसेक्स
Posted Date : 18-Dec-2020 12:00:00 pm

बर्गर किंग पर दूसरे दिन लगा लोअर सर्किट, 47000 के पार सेंसेक्स

नई दिल्ली। विदेशों से निवेश प्रवाह जारी रहने के बीच बंबई शेयर बाजार में शुक्रवार को कारोबार की शुरुआत सेंसेक्स के नई रिकार्ड ऊंचाई पर पहुंचने के साथ हुई। हालांकि, मुनाफा वसूली चलने से बाजार में उतार - चढ़ाव का रुख दिखाई दिया। बीएसई का सेंसेक्स कारोबार की शुरुआत में अपने सर्वकालिक उच्चस्तर 47,026.02 अंक पर खुलने के बाद मुनाफा वसूली से नीचे आ गया और कुछ देर बाद 46,749.04 अंक पर देखा गया। पिछले दिन के मुकाबले यह 141.30 अंक यानी 0.30 प्रतिशत नीचे रहा। इसी प्रकार नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी भी शुरुआत में 13,771.45 अंक की ऊंचाई पर खुलने के कुछ देर बाद ही नीचे 13,713.55 अंक पर आ गया। इसमें भी पिछले दिन की समाप्ति पर दर्ज निफ्टी के मुकाबले 44.90 अंक की गिरावट रही।
सेंसेक्स में शामिल शेयरों में ओएनजीसी सबसे ज्यादा नुकसान में रहा। इसमें तीन प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई। इसके बाद इंडसइंड बैंक, एचडीएफसी बैंक और एचडीएफसी, बजाज फाइनेंस और कोटक बैंक के शेयरों में भी गिरावट का रुख रहा। इसके विपरीत इन्फोसिस, एचसीएल टेक, टीसीएस, नेस्ले इंडिया और बजाज आटो बढ़त दिखाने वाले शेयरों में शामिल रहे। बाजार सूत्रों का कहना है कि बाजार में उच्चस्तर पर बिकवाली का जोर रहा। इस बीच वैश्विक बाजार में कच्चे तेल का ब्रेंट वायदा भाव 0.23 प्रतिशत नीचे आकर 51.38 डालर प्रति बैरल पर बोला गया।
बर्गर किंग पर लगा लोअर सर्किट बर्गर किंग के शेयर में लगातार दूसरे दिन लोअर सर्किट लगा। लगातार दो कारोबारी सत्रों में इसका शेयर 20-20 फीसदी उछला लेकिन गुरुवार को 10 फीसदी का लोअर सर्किट लगा और भी बर्गर किंग पर लोअर सर्किट लगा। आज शेयर की कीमत 157.50 रुपये पर आ गई।

पीपीएफ खाता निष्क्रिय होने पर होते हैं तीन नुकसान
Posted Date : 18-Dec-2020 11:58:58 am

पीपीएफ खाता निष्क्रिय होने पर होते हैं तीन नुकसान

नई दिल्ली । कोरोना के बाद जमा पर घटते ब्याज के बीच पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ) मौजूदा समय में निवेश का एक लोकप्रिय विकल्प है। ऐसा इसलिए की पीपीएफ पर अभी भी 7.1 फीसदी की दर से ब्याज मिल रहा है। वहीं, सावधि जमा (एफडी) पर ब्याज की दर घटकर छह फीसदी से नीचे आ गई है। हालांकि, एक ओर जहां पीपीएफ खाते पर अधिक ब्याज और कर छूट का फायदा मिलता है, वहीं दूसरी ओर खाता परिपक्वता अवधि से पहले निष्क्रिय होने पर खाताधारक को तीन तरह का नुकसान भी उठाना पड़ता है।  सरकार ने 2016 में पीपीएफ नियमों में एक महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है। इसमें सरकार ने कुछ खास स्थितियों में परिपक्वताके पहले पीपीएफ खाते को बंद करने की अनुमति दी है। जिन स्थितियों में खाता बंद करने की सुविधा दी गई है उसमें जानलेवा बीमारी का इलाज या बच्चे की शिक्षा के लिए खर्च शामिल हैं। हालांकि, पीपीएफ खाते के पांच साल चलने के बाद ही अंशदाता ऐसा कर सकते हैं। निष्क्रिय पीएपीएफ खाते के साथ यह सुविधा नहीं मिलती है।
 पीपीएफ खाते से तीसरे वित्त वर्ष के बाद छठे वित्त वर्ष के समाप्त होने तक जमा रकम पर लोन लिया जा सकता है। रुके हुए पीपीएफ खाते में यह सुविधा नहीं मिलती है।
 अगर खाताधारक बंद पड़े पीपीएफ खाते के अलावा कोई अन्य पीपीएफ खाता खुलवाना चाहता है तो नियम इसकी अनुमति नहीं देता है। किसी एक व्यक्ति के दो पीपीएफ खाते नहीं हो सकते हैं। हालांकि, निष्क्रिय हो चुके खाते में भी जमा राशि पर परिपक्वताकी अवधि पर ब्याज की राशि का भुगतान किया जाता है।
जानकारों के मुताबिक, खाता निष्क्रिय की मुख्य वजह होती है इसमें न्यूनतम राशि का भी निवेश नहीं करना। पीपीएफ खाते में हर साल 500 रुपये निवेश करना अनिवार्य है। 15 साल तक निवेशक को कम से कम यह रकम जमा करना पड़ता है। ऐसा नहीं करने पर खाता निष्क्रिय हो जाता है। वहीं, सालाना आधार पर पीपीएफ खाते में निवेशक अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक निवेश कर आयकर की धारा 80सी के तहत आयकर छूट का लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
सालाना अधार पर 50 रुपये देनी होगी पेनल्टी
पीपीएफ खाते को दोबारा चालू करने के लिए आपको उस बैंक या डाकघर जाना होगा जहां आपने यह खुला है। यहां आपको खाता दोबारा चालू कराने संबंधी एक फॉर्म भरना होगा। इसके बाद आपको बकाया राशि का भुगतान करना होगा। यानी जितने साल तक आपने जमा नहीं किया उनमें से हर वर्ष के लिए 500 रुपये का न्यनतम भुगतान करना होगा। अगर चार साल जमा नहीं किया है तो 2000 रुपये जमा करने होंगे। इसके साथ ही हर साल के हिसाब से 50 रुपये की पेनल्टी भी देनी होगी।
खाते में नहीं आया पैसा, तो पहले चेक कर लें कोड
Posted Date : 18-Dec-2020 11:58:35 am

खाते में नहीं आया पैसा, तो पहले चेक कर लें कोड

नई दिल्ली। पीएम किसान की 7वीं किस्त का इंतजार कर रहे लोगों के खातों में जल्द ही पैसा पहुंचेगा। अगर आप लाभार्थी हैं और अपने मोबाइल या कंप्यूटर पर स्टेटस चेक कर रहे हैं तो  जैसा कोड लिखकर आ रहा है को परेशान न हों। इसका मतलब है कि सरकार ने आपकी दी जानकारी को सुनिश्चित कर लिया है।   मैसेज दिखाई दे रहा है, तो परेशान न हों। आपकी किस्त जल्द ही आपके बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी जाएगी।  इसका मतलब हैं कि  राज्य सरकार द्वारा लाभार्थी के आधार नंबर, बैंक खाता संख्या और बैंक के आईएफसी कोड सहित अन्य विवरणों की शुद्धता सुनिश्चित कर ली गई हैं । आपकी किस्त राशि तैयार हैं और सरकार द्वारा इसे आपके बैंक खाते में भेजने के आदेश दे दिए गए हैं।  वहीं जब आप पीएम किसान सम्मान निधि की वेबसाइट  पर जाकर अपना पेमेंट स्टेटस चेक  करते हैं तब कई बार आपको   लिखा दिखता होगा। यहां आरएफटी की फुलफार्म  हैं। इसका मतलब हैं कि 'राज्य सरकार द्वारा लाभार्थी के डेटा की जांच कर ली गई है, जो कि सही पाया गया है।  इसके बाद राज्य सरकार केंद्र से अनुरोध करती है की लाभार्थी के खाते में पैसे भेजे जाएं।

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