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16-Nov-2018 8:34:32 am
Posted Date

वोडाफोन आइडिया के फाइबर एसेट्स खरीद सकती है भारती इंफ्राटेल

कोलकाता ,16 नवंबर । देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी वोडाफोन आइडिया के फाइबर एसेट्स के लिए टेलीकॉम टावर कंपनी भारती इंफ्राटेल संभावित बायर के तौर पर उभर सकती है। वोडाफोन आइडिया 25,000 करोड़ रुपये की इच्टिी फंडिंग भी जुटा रही है। इसके साथ ही फाइबर एसेट्स की बिक्री से मिलने वाली रकम से उसकी बैलेंस शीट मजबूत होगी और वह कैपिटल एक्सपेंडिचर कर रिलायंस जियो और भारती एयरटेल को टक्कर दे सकेगी।
मार्केट के जानकारों का कहना है कि इच्टिी फंडिंग में वोडाफोन आइडिया के प्रमोटर शेयरहोल्डर्स- ब्रिटेन का वोडाफोन ग्रुप और आदित्य बिड़ला ग्रुप- के 18,000 करोड़ रुपये से अधिक लगाने से यह संकेत मिल रहा है कि कंपनी लंबी अवधि तक दौड़ में बने रहना चाहती है और इससे प्राइस वॉर भी जारी रह सकती है। 
ब्रोकरेज हाउस क्रेडिट सुइस और बीएनपी पारिबा ने कहा कि आने वाले समय में वोडाफोन आइडिया के फाइबर एसेट्स के लिए भारती इंफ्राटेल एक संभावित बायर के तौर पर सामने आ सकती है। भारती इंफ्राटेल देश की दूसरी बड़ी टेलीकॉम कंपनी भारती एयरटेल की लिस्टेड टावर यूनिट है। 
बीएनपी पारिबा ने बताया, यह भारती इंफ्राटेल के लिए अच्छा है क्योंकि वोडाफोन आइडिया के लॉन्ग-टर्म के लिए बिजनेस में रहने के इरादे से मार्केट के दो कंपनियों के बीच सिमट जाने का जोखिम कम होगा। 
एनालिसिस मैसन के पार्टनर और हेड (इंडिया एंड मिडल ईस्ट) रोहन धमीजा ने वोडाफोन आइडिया के फाइबर नेटवर्क की वैल्यू लगभग 3,500 करोड़ रुपये होने का अनुमान जताया। हालांकि, इंडस्ट्री के सूत्रों का कहना है कि यह वैल्यू इससे अधिक हो सकती है। वोडाफोन आइडिया के पास 1,56,000 किलोमीटर का फाइबर नेटवर्क है।
इस सेक्टर के जानकारों का कहना है कि डेटा सर्विसेज की डिमांड बढऩे से भारती इंफ्राटेल के लिए वोडाफोन आइडिया और भारती एयरटेल के फाइबर एसेट्स खरीदना फायदेमंद हो सकता है। 
ग्लोबल रेटिंग एजेंसी फिच के डायरेक्टर (कॉरपोरेट्स) नितिन सोनी ने कहा, फाइबराइज्ड टावर नेटवर्क से 4 जी डेटा नेटवर्क में अच्छी बढ़ोतरी होती है और देश के 5 जी नेटवर्क लॉन्च करने की तैयारी के साथ यह बहुत जरूरी है। 
भारती इंफ्राटेल और इंडस टावर्स अपने मर्जर को अगले वर्ष मार्च तक पूरा करने की उम्मीद कर रही हैं। इससे ऐसी संयुक्त टावर कंपनी बनेगी जिसका कंट्रोल एयरटेल और वोडाफोन के पास होगा और दोनों कंपनियों की इसके बोर्ड में समान हिस्सेदारी रहेगी। 
एनालिस्ट्स ने कहा कि एयरटेल एक अलग फाइबर कंपनी में भी हिस्सेदारी बेचेगी और उससे मिलने वाले फंड का इस्तेमाल अपनी बैलेंस शीट को मजबूत करने में करेगी।

 

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