मुंबई । भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने जानकारी दी कि सोशल मीडिया पर मिसलीडिंग कंटेंट (भ्रामक सामग्री) के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई है, सेबी की ओर से अक्टूबर 2024 से 70,000 से अधिक पोस्ट और अकाउंट को हटाया गया है।
सेबी द्वारा यह कदम गलत सूचनाओं से निपटने और ऑनलाइन फाइनेंशियल इंफ्लूएंसर को रेगुलेट करने की कड़ी में उठाया गया है।
बाजार नियामक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के साथ मिलकर काम कर रहा है ताकि वह यह सुनिश्चित कर सके कि इस तरह का कोई भी कंटेंट किसी भी निवेशक को भ्रमित न करे।
सेबी के पूर्णकालिक सदस्य अनंत नारायण ने एसोसिएशन ऑफ रजिस्टर्ड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स (एआरआईए) शिखर सम्मेलन में सेबी के इन प्रयासों के बारे में जानकारी दी।
उन्होंने कहा, हम सभी के लिए एक आम चिंता अनरजिस्टर्ड निवेश सलाहकारों/शोध विश्लेषकों से जुड़ी है, जो निवेश में बढ़ती रुचि का गलत फायदा उठा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सेबी के प्रपोजल के तहत यूपीआई ‘पेराइट’ हैंडल का इस्तेमाल निवेशकों को रजिस्टर्ड संस्थाओं की आसानी से पहचान करने में मदद करेगा, ताकि वे खुद को धोखेबाजों से बचा सकें।
नारायण ने कहा, निवेश में बढ़ती रुचि के साथ ही अनरजिस्टर्ड निवेश सलाहकारों और शोध विश्लेषकों की संख्या में भी तेजी से वृद्धि हुई है। ये निवेश सलाहकार और शोध विश्लेषक निवेशकों को गुमराह करते हैं।
नारायण ने यह भी घोषणा की कि सेबी निवेशकों के व्यवहार को बेहतर ढंग से समझने और अपनी आउटरीच रणनीतियों में सुधार करने के लिए एक राष्ट्रव्यापी सर्वे की योजना बना रहा है।
विदेशी निवेश पर नारायण ने कहा, ग्लोबल डेट इंडाइसेस में भारत के शामिल होने से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) ऋण प्रवाह में वृद्धि दर्ज की गई है और इसने इंवेस्टमेंट मिक्स में सुधार किया है।
उन्होंने कहा कि भारत जैसे विकासशील देश के लिए इस तरह के निवेश को आकर्षित करना एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन देश को मजबूत आर्थिक विकास, वित्तीय स्थिरता और शासन को बनाए रखने की भी जरूरत है।
इस बीच, सेबी बोर्ड 24 मार्च को नए प्रमुख तुहिन कांता पांडे के नेतृत्व में अपनी पहली बैठक आयोजित करने वाला है।
बाजार नियामक एल्गोरिथम ब्रोकरों के लिए एक सेटलमेंट स्कीम पेश कर सकता है और शोध विश्लेषकों के लिए फी कलेक्शन पीरियड को बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है।
नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने बताया कि टेलीकॉम फ्रॉड से निपटने के लिए संचार साथ पोर्टल के जरिए अब तक 3.4 करोड़ से ज्यादा मोबाइल फोन को डिस्कनेक्ट किया गया है और 3.19 लाख आईएमईआई नंबर को ब्लॉक किया गया है। दूरसंचार विभाग ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बिग डेटा की मदद से 16.97 लाख वॉट्सऐप अकाउंट भी ब्लॉक कर दिए गए हैं।
राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में संचार और ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्रशेखर ने कहा कि दूरसंचार विभाग की ‘संचार साथी पहल’ के तहत 20,000 से ज्यादा बल्क एसएमएस भेजने वालों को भी ब्लैकलिस्ट किया गया है। सरकार के संचार साथी पोर्टल पर नागरिकों को ‘चक्षु’ की मदद से संदिग्ध धोखाधड़ी से जुड़े कम्युनिकेशन को रिपोर्ट करने की सुविधा मिलती है।
डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी ने कहा कि संदिग्ध धोखाधड़ी से जुड़ी शिकायतें मिलने के बाद दूरसंचार विभाग इनकी जांच करता है। इसके बाद जांच में गलत पाए गए नंबर को ब्लॉक किया जाता है। व्यक्तिगत रूप से रिपोर्ट किए गए संदिग्ध धोखाधड़ी कम्युनिकेशन पर कार्रवाई करने के बजाय दूरसंचार विभाग अपनी जांच के लिए क्राउड-सोर्स डेटा का इस्तेमाल करता है, ताकि टेलीकॉम रिसोर्सेस का गलत इस्तेमाल होने से रोका जा सके।
दूरसंचार विभाग एआई बेस्ड टूल्स और बिग डेटा एनालिसिस के साथ नकली दस्तावेजों पर लिए गए संदिग्ध मोबाइल कनेक्शनों की पहचान करता है। इसके अलावा, दूरसंचार विभाग और दूरसंचार सेवा प्रदाताओं (टीएसपी) ने ऐसी अंतरराष्ट्रीय स्पूफ कॉलों की पहचान करने के लिए एक नया सिस्टम तैयार किया है, जो असल में विदेशों से होती हैं और भारत से आने वाली कॉल लगती हैं। इस सिस्टम के साथ इस तरह की कॉल की पहचान रियल टाइम में की जा सकती है और नंबर को ब्लॉक किया जा सकता है।
इस बीच, दूरसंचार सेवा प्रदाताओं ने 1,150 संस्थाओं/व्यक्तियों को ब्लैकलिस्ट कर दिया है और 18.8 लाख से ज्यादा रिसोर्सेस को डिस्कनेक्ट कर दिया है। इन कार्रवाइयों के साथ अनरजिस्टर्ड टेलीमार्केटर्स (यूटीएम) के खिलाफ शिकायतों में कमी आई है, जो कि अगस्त 2024 में 1,89,419 थीं और जनवरी 2025 में घटकर 1,34,821 रह गईं। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने 12 फरवरी को दूरसंचार वाणिज्यिक संचार ग्राहक वरीयता विनियम (टीसीसीसीपीआर), 2018 में संशोधन किया।
अब ग्राहक स्पैम/अनसॉलिसिटेड कमर्शियल कम्युनिकेशन (यूसीसी) को लेकर स्पैम मिलने के सात दिन के भीतर शिकायत दर्ज करवा सकता है। पहले यह समय सीमा 3 दिन थी। इसके अलावा, अनसॉलिसिटेड कमर्शियल कम्युनिकेशन (यूसीसी) को लेकर अनरजिस्टर्ड सेंडर के खिलाफ एक्सेस प्रोवाइडर द्वारा कार्रवाई करने की समय सीमा भी 30 दिनों से घटाकर 5 दिन कर दी गई है। यूसीसी भेजने वालों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए उनके खिलाफ कार्रवाई करने के मानदंड को रिवाइज कर पहले से अधिक कठोर बनाया गया है।
जयपुर । भारत का आईटी उद्योग, जो अर्थव्यवस्था, रोजगार और निर्यात में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, अमेरिका द्वारा संभावित शुल्क के प्रभाव के लिए तैयार हो रहा है। भारत के आईटी उद्योग में बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग (बीपीओ) शामिल है। बीपीओ सूचना प्रौद्योगिकी सक्षम सेवाओं (आईटीईएस) उद्योग का हिस्सा है और भारत इस क्षेत्र में अग्रणी है। बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग (बीपीओ) का अर्थ है कंपनी के कार्यों के एक हिस्से को किसी तीसरे पक्ष को आउटसोर्स करना। बीपीओ को उप-अनुबंध भी कहा जाता है। इसका उपयोग विभिन्न कार्यों के लिए किया जाता है, जैसे कि ग्राहक सेवा, पेरोल, बिलिंग, बीमा दावा प्रसंस्करण, आदि। बीपीओ का उपयोग विभिन्न उद्योगों में किया जाता है, जैसे कि विनिर्माण, ई-कॉमर्स, स्वास्थ्य सेवा और वित्त।
व्यापार अनुमानों के अनुसार, सूचना प्रौद्योगिकी और बिजनेस प्रोसेस मैनेजमेंट (आईटी-बीपीएम) क्षेत्र ने देश के 4.27 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में लगभग 7.5 प्रतिशत का योगदान दिया। ट्रम्प ने पहले ही भारत के इस्पात और एल्यूमीनियम उद्योग पर 25 प्रतिशत शुल्क लगाया है और अमेरिकी राष्ट्रपति 2 अप्रैल से अधिक वस्तुओं और वस्तुओं पर शुल्क लगाने की संभावना है, जिसकी उन्होंने पहले ही घोषणा कर दी है।
डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत के खिलाफ पारस्परिक शुल्क लगाने की बात कही है। उनके अनुसार, भारत दुनिया के सबसे अधिक शुल्क लगाने वाले देशों में से एक है, ट्रम्प ने बुधवार को रूढि़वादी मीडिया आउटलेट ब्राइटबार्ट के साथ एक साक्षात्कार में कहा।
आईटी क्षेत्र में रुचि रखने वाले भारतीय उद्यमी अजय डाटा ने कहा, आने वाले महीनों में अमेरिका में मंदी की संभावना बढ़ रही है। यदि शुल्क मंदी के साथ गहरा होता है, तो भारत के सबसे तेजी से बढ़ते व्यवसाय पर बुरा प्रभाव पड़ेगा। अमेरिका द्वारा शुल्क लगाने से भारत का आईटी उद्योग सबसे अधिक प्रभावित होगा। भारत के कुल निर्यात में आईटी उत्पादों और इंजीनियरिंग वस्तुओं की हिस्सेदारी सबसे अधिक है। ऐसी स्थिति में, शुल्क के कारण आईटी क्षेत्र की वृद्धि लगभग नीचे चली जाएगी, डाटा ने कहा।
भारत का आईटी उद्योग हर साल 280 अरब डॉलर से अधिक का निर्यात करता है। साथ ही, यह देश में लाखों लोगों के लिए रोजगार भी पैदा करता है। व्यापार अनुमानों के अनुसार, दक्षिण एशियाई देश में उद्योग में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 54 लाख से अधिक लोग कार्यरत हैं। डाटा ने आगे कहा, भारत के आईटी उद्योग के निर्यात आदेशों का एक बड़ा हिस्सा, लगभग 50-55 प्रतिशत, अमेरिका से आता है। ऐसी स्थिति में, यदि ट्रम्प की शुल्क नीति लागू की जाती है, तो यह भारतीय सॉफ्टवेयर कंपनियों की लागत में वृद्धि करेगा। इससे इस क्षेत्र के निर्यात पर असर पड़ेगा और नौकरियों में भी मुश्किलें आएंगी।
भारत के प्रमुख आर्थिक दैनिक, इकोनॉमिक टाइम्स (ईटी) ने आईटी आउटसोर्सिंग विशेषज्ञ पारीक जैन के हवाले से कहा कि इस क्षेत्र की कंपनियों में अमेरिका में मंदी की संभावना और ट्रम्प की शुल्क नीति को लेकर डर है। इससे उनकी दीर्घकालिक और मध्यम अवधि की योजनाएं चुनौतीपूर्ण हो रही हैं। ईटी द्वारा उद्धृत एलएंडटी टेक्नोलॉजी सर्विसेज के प्रमुख अमित चड्ढा का कहना है कि कई आईटी कंपनियां वर्तमान में शुल्क युद्ध के संबंध में ‘प्रतीक्षा और देखें की स्थिति में हैं।
वित्तीय वर्ष 2024-25 (अप्रैल से मार्च) में, इस क्षेत्र की समग्र वृद्धि लगभग 6 प्रतिशत होने का अनुमान है, जो 2024-2025 के दौरान देश की 6.3-6.8 प्रतिशत की जीडीपी वृद्धि के अनुमान से थोड़ा कम होगा। साथ ही, आईटी उद्योग दुनिया में बड़े बदलाव देख रहा है। मशीन लर्निंग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और डेटा विश्लेषण का काम बढ़ रहा है। यहां भारत की प्रतिस्पर्धा ज्यादातर चीन से है। इसलिए, यदि इस क्षेत्र में परिवर्तन होता है, तो यह देश के आईटी क्षेत्र को लंबे समय तक प्रभावित करेगा।
डाटा ने कहा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की तीव्र प्रगति और अमेरिकी शुल्क का कार्यान्वयन महत्वपूर्ण तरीकों से रोजगार परिदृश्य को बदल रहा है। एआई से देश में लगभग 30-35 प्रतिशत नौकरियों पर असर पडऩे की आशंका है, जिससे कुछ भूमिकाओं का विस्थापन और उन्नत कौशल की आवश्यकता वाले नए अवसरों का निर्माण होगा। साथ ही, अमेरिकी शुल्क, विशेष रूप से इस्पात और एल्यूमीनियम जैसे आयात को लक्षित करने वाले, विनिर्माण रोजगार में 5 प्रतिशत की कमी से जुड़े हैं, क्योंकि बढ़ी हुई उत्पादन लागत और जवाबी उपाय घरेलू उद्योगों के लिए इच्छित सुरक्षात्मक लाभों से अधिक हैं।
उन्होंने आगे कहा, इन गतिशीलता से विकसित हो रहे नौकरी बाजार में नेविगेट करने के लिए रणनीतिक कार्यबल विकास और अनुकूलनीय आर्थिक नीतियों की आवश्यकता पर बल दिया गया है। आईटी विशेषज्ञ बीके झा ने कहा, कंपनियां शुल्क निर्णयों का इंतजार कर रही हैं और इसे ध्यान में रखते हुए, कई भारतीय आईटी कंपनियां अमेरिका में सामग्री का स्थानीयकरण भी कर रही हैं और इसे प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए वहां से वितरित कर रही हैं।
झा ने कहा, तो, क्या हम आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में नौकरी के नुकसान देख रहे हैं? मैं कहूंगा हां, और यह चिंता का एक बड़ा कारण है क्योंकि यह उद्योग 50 लाख से अधिक लोगों को रोजगार देता है, उन्होंने कहा। बिजनेस सूचना कंपनी सेंटर फॉर मॉनिटरिंग ऑफ इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) के अनुसार, भारत की बेरोजगारी दर वर्तमान में 8 प्रतिशत है, जो काफी अधिक है।
नई दिल्ली । केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि एमएसएमई के नेतृत्व में आईटी सेक्टर अगले वित्त वर्ष में 450 बिलियन डॉलर के सेवा निर्यात लक्ष्य तक पहुंच सकता है। केंद्रीय मंत्री गोयल ने भारत की आर्थिक वृद्धि में आईटी और आईटी-इनेबल्ड सर्विसेज (आईटीईएस) सेक्टर की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पिछले साल सर्विस सेक्टर का निर्यात लगभग 340 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जिसमें आईटी और आईटीईएस का योगदान लगभग 200 बिलियन डॉलर रहा। इस साल, सेवा निर्यात (सर्विस एक्सपोर्ट) 380 बिलियन डॉलर से 385 बिलियन डॉलर के बीच पहुंचने की उम्मीद है, जिससे भारत की वैश्विक उपस्थिति और मजबूत होगी। नैसकॉम द्वारा आयोजित ‘ग्लोबल कॉन्फ्लुएंस 2025’ में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत की प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता को बढ़ाने में इनोवेशन और अनुकूलनशीलता की अहम भूमिका है।
केंद्रीय मंत्री ने अमृत काल में देश के आर्थिक परिवर्तन के प्रमुख कारकों के रूप में भारत के आईटी सेक्टर और एमएसएमई में विश्वास की पुष्टि की, जो एक विकसित और समृद्ध भारत की दिशा में सामूहिक रूप से काम कर रहे हैं। उन्होंने निरंतर सीखने की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए नैसकॉम की प्रशंसा की, जिसमें कहा गया कि आईटी सेक्टर क्वांटम कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग जैसी नई तकनीकों को अपनाकर लगातार आगे बना हुआ है। केंद्रीय मंत्री ने देश के एक विशाल टैलेंट पूल का लाभ उठाते हुए भारत में वैश्विक क्षमता केंद्रों (जीसीसी) को आकर्षित करने की जरूरत पर भी जोर दिया। टैलेंट को विदेश में रिलोकेट करने के बजाय भारत से संचालन करने के लिए व्यवसायों को प्रोत्साहित करते हुए उन्होंने कहा कि इससे विदेशी मुद्रा आय बढ़ेगी और घरेलू आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।
भारत के बढ़ते मध्यम वर्ग और बढ़ते उपभोग स्तरों पर चर्चा करते हुए, केंद्रीय मंत्री गोयल ने आईटी-आधारित विकास के लाभों को रेखांकित किया, जिसमें कमर्शियल रियल एस्टेट, हाउसिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती मांग शामिल है। केंद्रीय मंत्री गोयल ने उपस्थित लोगों से कहा, नैसकॉम इस बदलते दौर में काफी अहम भूमिका निभा रहा है। उसे आईटी प्रोफेशनल के कौशल को मांझने के लिए ट्रेनिंग जारी रखनी चाहिए।केंद्रीय मंत्री ने मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) और द्विपक्षीय संबंधों के माध्यम से वैश्विक भागीदारी का विस्तार करने को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। केंद्रीय मंत्री ने मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) और द्विपक्षीय संबंधों के माध्यम से वैश्विक भागीदारी का विस्तार करने को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
नई दिल्ली । इंडसइंड बैंक ने अपने डेरिवेटिव पोर्टफोलियो में विसंगतियों की जांच के लिए एक स्वतंत्र पेशेवर फर्म को नियुक्त किया है। पिछले सप्ताह बैंक ने जानकारी दी थी कि उसने अपने डेरिवेटिव पोर्टफोलियो में विसंगतियों की पहचान की है, जिसका दिसंबर 2024 तक उसके नेटवर्थ पर लगभग 2.35 प्रतिशत प्रभाव पड़ सकता है। स्टॉक एक्सचेंजों को दिए गए एक नए बयान में बैंक ने कहा कि स्वतंत्र फर्म हाल ही में पेश की गई लेखांकन विसंगतियों के मूल कारण की पहचान करने के लिए एक बड़े स्तर पर जांच करेगी।
फर्म अकाउंटिंग स्टैंडर्ड्स को लेकर डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट के अकाउंटिंग ट्रीटमेंट के सही या गलत होने और इसके प्रभाव का आकलन करेगी। स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में कहा गया, 10 मार्च 2025 को बैंक ने अपने डेरिवेटिव पोर्टफोलियो से जुड़े अकाउंट बैलेंस को लेकर बैंक द्वारा पहचानी गई कुछ विसंगतियों की एक बाहरी एजेंसी द्वारा चल रही समीक्षा की जानकारी दी थी। बैंक ने कहा था कि एक बार रिव्यू पूरा हो जाने पर यह अपने फाइनेंशियल स्टेटमेंट पर पडऩे वाले किसी भी परिणामी प्रभाव की जानकारी खुद ही देगा।
इसके अलावा, निदेशक मंडल ने अपनी बैठक में एक स्वतंत्र पेशेवर फर्म को नियुक्त करने का फैसला किया था। फर्म को विसंगतियों के मूल कारण की पहचान करने, अकाउंटिंग स्टैंडर्ड्स को लेकर डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट के अकाउंटिंग ट्रीटमेंट के सही या गलत होने; इसके प्रभाव का आकलन करने, किसी भी चूक की पहचान करने और जवाबदेही के लिए एक बड़ी जांच करने के उद्देश्य से नियुक्त किया जाना तय हुआ था। बैंक ने पहले कहा था कि बैंक के इंटरनल रिव्यू की फाइंडिंग्स की जांच के लिए एक बाहरी एजेंसी काम कर रही है।
इसके अलावा, भारतीय रिजर्व बैंक ने भी इंडसइंड बैंक की वित्तीय हालत के बारे में अटकलों के बाद बैंक के जमाकर्ताओं को बैंक की वित्तीय स्थिरता का आश्वासन दिया है। केंद्रीय बैंक ने पुष्टि की कि बैंक अच्छी तरह से पूंजीकृत है और जमाकर्ताओं के लिए चिंता की कोई बात नहीं है। आरबीआई ने कहा कि इंडसइंड बैंक की वित्तीय हालत स्थिर बनी हुई है और रिजर्व बैंक इस पर कड़ी निगरानी रख रहा है।
आरबीआई के अनुसार, इंडसइंड बैंक ने 31 दिसंबर, 2024 को समाप्त तिमाही के लिए 16.46 प्रतिशत का कैपिटल एडवकेसी रेशो (सीएआर) और 70.20 प्रतिशत का प्रोविजन कवरेज रेशो (पीएआर) दर्ज किया है। बैंक ने 9 मार्च, 2025 तक 113 प्रतिशत का लिक्विडिटी कवरेज रेशो (एलसीआर) बनाए रखा, जो 100 प्रतिशत की नियामक जरूरत से काफी ऊपर है। केंद्रीय बैंक ने वित्तीय अनिश्चितताओं के दौरान जमाकर्ताओं की सुरक्षा में अपने मजबूत ट्रैक रिकॉर्ड को लेकर भी जानकारी दी।
नई दिल्ली। इंडियन वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को 2024 में 1.96 बिलियन डॉलर का निवेश प्राप्त हुआ, जो पिछले साल रियल एस्टेट सेक्टर में प्राप्त कुल संस्थागत निवेश का 29 प्रतिशत है। गुरुवार को जारी एक लेटेस्ट रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। रिपोर्ट के अनुसार, क्विक कॉमर्स सेक्टर के तेजी से विस्तार के बीच वेयरहाउस की बढ़ती मांग के कारण इस सेक्टर में निवेश प्रवाह सालाना आधार पर 203 प्रतिशत तक बढ़ गया।
नतीजतन, मांग में इस उछाल के परिणामस्वरूप 2024 में 44.9 मिलियन वर्ग फीट (वर्ग फीट) का रिकॉर्ड अब्सॉप्र्शन हुआ, जो पिछले वर्ष की तुलना में 19 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। 2024 की दूसरी छमाही में ही 28.3 मिलियन वर्ग फीट अब्सॉप्र्शन देखा गया, जो कि 2024 की पहली छमाही की तुलना में 70 प्रतिशत की वृद्धि है और किसी एक कैलेंडर वर्ष में दर्ज किया गई अब तक की सबसे अधिक वृद्धि है।
वेस्टियन के सीईओ श्रीनिवास राव ने कहा, निवेशकों की सकारात्मक भावनाओं, केंद्रीय बजट 2025-26 में घोषणाओं और मजबूत घरेलू मांग के कारण भारत की स्थिति एक प्रमुख लॉजिस्टिक्स हब के रूप में मजबूत होने वाली है। मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पर सरकार द्वारा लगातार ध्यान देने से इस क्षेत्र में विकास को और बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
2024 में अब्सॉप्र्शन का एक बड़ा हिस्सा थर्ड-पार्टी लॉजिस्टिक्स कंपनियों में केंद्रित था, जो कि पैन-इंडिया अब्सॉप्र्शन का 33 प्रतिशत था। इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की हिस्सेदारी 2023 में 18 प्रतिशत से बढक़र 2024 में 24 प्रतिशत हो गई, जो कि उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान जैसी विभिन्न सरकारी पहलों की वजह से था। मुंबई ने 2024 में 18.6 मिलियन वर्ग फीट का उच्चतम अब्सॉप्र्शन रिकॉर्ड किया, इसमें पिछले वर्ष की तुलना में 82 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
अब्सॉप्र्शन में वृद्धि का श्रेय नवी मुंबई हवाई अड्डे के माध्यम से बेहतर इंटरसिटी कनेक्टिविटी और प्रमुख टियर-1 शहरों में क्विक कॉमर्स में वृद्धि को दिया जा सकता है। पुणे के अब्सॉप्र्शन में 85 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो टॉप सात शहरों में सबसे अधिक वृद्धि है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2024 के दौरान चेन्नई, हैदराबाद और कोलकाता में पैन इंडिया अब्सॉप्र्शन का 15 प्रतिशत हिस्सा था, जो एक साल पहले 22 प्रतिशत से गिरावट दर्शाता है।