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रेलवे ने अब तक देश के विभिन्न राज्यों में अब तक 2960 टन से अधिक तरल चिकित्सा ऑक्सीजन पहुंचाई
Posted Date : 07-May-2021 4:58:41 pm

रेलवे ने अब तक देश के विभिन्न राज्यों में अब तक 2960 टन से अधिक तरल चिकित्सा ऑक्सीजन पहुंचाई

नईदिल्ली,07 मई । भारतीय रेल उभरती चुनौतियों का सामना करते हुए और नए उपायों की तलाश के साथ में देश के विभिन्न राज्यों की मांग पर तरल चिकित्सा ऑक्सीजन की आपूर्ति के अपने अभियान को निरंतर जारी रख लोगों को राहत पहुंचा रही है।रेलवे ने अब तक देश के विभिन्न राज्यों में 185 टैंकरों में लगभग 2960 मीट्रिक टन चिकित्सा उपयोग हेतु ऑक्सीजन की आपूर्ति की है। 
अब इस अभियान के अंतर्गत 47ऑक्सीजन एक्सप्रेस अपनी यात्रा पूरी कर चुकी हैं। 
भारतीय रेल राज्यों की मांग पर यथासंभव मात्रा में तरल मेडिकल ऑक्सीजन की आपूर्ति करने को लेकर अपनी प्रतिबद्धता पर लगातार काम कर रही है। 
अब तक महाराष्ट्र को 174 मीट्रिक टन, उत्तर प्रदेश को 729 मीट्रिक टन, मध्य प्रदेश को 249 मीट्रिक टन, हरियाणा को 305 मीट्रिक टन, तेलंगाना को 123 मीट्रिक टन और दिल्ली को 1334 मीट्रिक टन ऑक्सीजऩ की आपूर्ति की गई।
इस समय ऑक्सीजऩ एक्सप्रेस के द्वारा 18 टैंकरों में 260 टन से अधिक तरल चिकित्सा ऑक्सीजन अपने मार्ग पर हैं जिनकी डिलिवरी महाराष्ट्र, हरियाणा और दिल्ली में की जानी है। रेलवे द्वारा की जा रही ऑक्सीजऩ की ढुलाई एक जटिल प्रक्रिया है और ढुलाई से जुड़े आंकड़े लगातार अपडेट किए जा रहे हैं। कुछ और ऑक्सीजन एक्सप्रेस देर रात अपने-अपने गंतव्य की ओर रवाना हो सकती हैं। 

परमाणु ऊर्जा विभाग महामारी से लड़ऩे में देश के कोविड बुनियादी ढांचे में सहायता कर रहा है
Posted Date : 07-May-2021 4:58:17 pm

परमाणु ऊर्जा विभाग महामारी से लड़ऩे में देश के कोविड बुनियादी ढांचे में सहायता कर रहा है

0-केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा
नईदिल्ली,07 मई । केंद्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास (डोनर) राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा तथा अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने शुक्रवार को कहा कि भाभा परमाणु केंद्र और परमाणु ऊर्जा विभाग (डीएई) कोविड संबंधित उपकरणों तथा टेक्नोलॉउपलब्ध कराने के जरिये महामारी से लड़ऩे में देश की सहायता कर रहे हैं। विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक ऑॅनलाइन समीक्षा बैठक में डॉ. जितेंद्र सिंह ने कोविड-19 के दौरान जन कल्याण के लिए की गई पहलों की सराहना की।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि कोबाल्ट सोर्स का उपयोग करने के जरिये पीपीई किट्स के स्टरलाइजेशन के लिए किए गए प्रोटोकॉल के विकास में पीपीई किट्स के पुर्नउपयोग की संभावना है। इसी प्रकार, एचईपीए फिल्टर टेक्नोलॉके उपयोग के जरिये एन-99 मास्क का विकास किया गया है। उन्होंने ने कहा कि यह मास्क एन-95 मास्क से बेहतर है और एन-99 मास्क पहले ही तीन स्वतंत्र प्रयोगशालाओं द्वारा प्रमाणित किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि इस टेक्नोलॉको व्यापक स्तर पर उत्पादन के लिए ट्रांसफर किया गया है क्योंकि यह टिकाऊ तथा एन-95 मास्क की तुलना में सस्ता है। 
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि परमाणु ऊर्जा विभाग ने पावर्ड रेस्पिरेटर्स, रीफर, पोर्टेबल प्लाज्मा स्टरलाइजेशन तथा मेडिकल अपशिष्टों के लिए प्लाज्मा इनसिनेरेशन टेक्नोलॉके अतिरिक्त, आरटी-पीसीआर टेस्टिंग के लिए सफलतापूर्वक रिएजेंट्स को भी डेवेलप किया है। 
डॉ. जितेंद्र सिंह को वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा जानकारी दी गई कि टाटा मेमोरियल के सभी अस्पतालों में कोविड से संक्रमित रोगियों के लिए 25 प्रतिशत बेड जो लगभग 600 हैं, आरक्षित कर दिये गये है। 6 एलपीएम के लगभग 5,000 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर्स विदेशों से दान के रूप में टाटा मेमोरियल सेंटर (टीएमसी) द्वारा प्राप्त किए जा रहे हैं और इनमें से अधिकांश देश के अन्य कैंसर अस्पतालों में दे दिए जाएंगे। 
डॉ. जितेंद्र सिंह ने जानकारी दी कि कोविड-19 की गंभीरता के लिए आनुवंशिक संवेदनशीलता निर्धारित करने के लिए वर्तमान में टाटा मेमोरियल अस्पताल के सहयोग से ‘कोविड-19 के लिए निगरानी जांच‘ अध्ययन किया जा रहा है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने इसे अनूठा और दुनिया में हो रहे दुर्लभतम अध्ययनों में से एक बताया जिसके परिणाम बहुत जल्द वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय के साथ साझा किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, एक अध्ययन उन मौखिक संकेतों का पता लगाने के लिए भी किया जा रहा है जो कोविड-19 की गंभीरता का अनुमान लगा सकते हैं।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने पिछले वर्ष जून में कोविड बीप लांच करने का स्मरण करते हुए कहा कि आईआईटी हैदराबाद तथा ईसीआईसी मेडिकल कॉलेज हैदराबाद के सहयोग से डीएई द्वारा विकसित सिस्टम कोविड-19 मरीजों के लिए भारत की पहली स्वदेशी, किफायती, वायरलेस फिजियोलॉजिकल पैरामीटर्स मोनिटरिंग सिस्टम है। उन्होंने कहा कि कोविड बीप इसका बिल्कुल सटीक उदाहरण है कि किस प्रकार भारत के विख्यात संस्थानों के बीच समन्वय न्यूनतम लागत के साथ देश के सामने आने वाली अधिकांश चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत कर सकता है और देश को वास्तविक अर्थों में आत्मनिर्भर बना सकता है।
डीएई सचिव के एन व्यास, न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑॅफ इंडिया लिमिटेड (एनपीसीआईएल) के सीमएडी एस के शर्मा, बीएआरसी के निदेशक डॉ. ए के मोहंती तथा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने समीक्षा बैठक में भाग लिया।  

भारतीय सशस्त्र बलों के पूर्व चिकित्सकों ने आम मरीजों के लिए ऑनलाइन परामर्श देना शुरू किया
Posted Date : 07-May-2021 4:57:07 pm

भारतीय सशस्त्र बलों के पूर्व चिकित्सकों ने आम मरीजों के लिए ऑनलाइन परामर्श देना शुरू किया

नईदिल्ली,07 मई । रक्षा सचिव डॉ. अजय कुमार, आईएएस और सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा महानिदेशक (डीजीएएफएमएस) सर्जन वाइस एडमिरल रजत दत्ता, एवीएसएम, एसएम, वीएसएम, पीएचएस, ने देश के आह्वान का जवाब देने के लिए आगे आने वाले सेना के पूर्व डॉक्टरों को संबोधित किया है। सेना के पूर्व डॉक्टर अब भारत के सभी नागरिकों के लिए ई-संजीवनी ओपीडी पर सेना के पूर्व डॉक्टरों द्वारा ऑनलाइन परामर्श सेवा के लिए उपलब्ध होंगे।
ई-संजीवनी ओपीडी भारत सरकार का प्रमुख टेलीमेडिसिन प्लेटफ़ॉर्म है जिसे सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ़ एडवांस कंप्यूटिंग (सी-डैक), मोहाली, भारत सरकार के तत्वावधान में विकसित किया गया है और यह बहुत अच्छी तरह से काम कर रहा है। यह प्लेटफॉर्म किसी भी भारतीय नागरिक को मुफ्त परामर्श प्रदान करता है। हालांकि, कोविड मामलों में वृद्धि के साथ, डॉक्टरों की मांग बढ़ रही है, लेकिन, डॉक्टरों के कोविड वॉर्ड की ड्यूटी से हट जाने के कारण डॉक्टरों की कमी हो गई है। ऐसी स्थिति में सेना के पूर्व डॉक्टर मदद करने के लिए आगे आ रहे हैं।
मुख्यालय एकीकृत रक्षा स्टाफ की चिकित्सा शाखा सेवारत और सेवानिवृत्त रक्षा कर्मियों के लिए टेलीमेडिसिन सेवा प्रदान करता है। चिकित्सा शाखा ने देश के सामान्य नागरिक रोगियों के लिए इस पूर्व-रक्षा ओपीडी को शुरू करने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय और राष्ट्रीय सूचना केंद्र के साथ समन्वय किया है। आईडीएस मेडिकल के उपाध्यक्ष ने सेवानिवृत्त एएफएमएस डॉक्टरों की सभी सेवानिवृत्त बिरादरी से इस मंच से जुडऩे और संकट के इस समय में भारत के नागरिकों को बहुमूल्य परामर्श प्रदान करने का आग्रह किया है, जब देश कठिन समय से गुजर रहा है।
सेना के सेवानिवृत्त डॉक्टरों से अच्छी प्रतिक्रिया मिली है और जल्द ही इसमें सेना के कई सेवानिवृत्त डॉक्टरों के शामिल होने की उम्मीद है। इसके बाद, एक अलग राष्ट्रव्यापी सेना के पूर्व डॉक्टरों की ओपीडी की परिकल्पना की गई है। उनका विशाल अनुभव और विशेषज्ञता से देश के सामान्य नागरिक रोगियों को अपने घरों पर परामर्श प्राप्त करने और संकट से निपटने में मदद मिलेगी।

ऑक्सीजन सप्लाई पर दिल्ली हाईकोर्ट का आदेश को बताया सही
Posted Date : 07-May-2021 4:55:59 pm

ऑक्सीजन सप्लाई पर दिल्ली हाईकोर्ट का आदेश को बताया सही

0-केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट से लगा झटका 
नई दिल्ली,07 मई । ऑक्सीजन सप्लाई के मुद्दे पर कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ जाने वाली केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उसने कर्नाटक हाईकोर्ट के 1200 मिट्रिक टन ऑक्सीजन देने के आदेश खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र को राज्य के लिए 1200 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की आपूर्ति करने का कर्नाटक उच्च न्यायालय का आदेश अच्छी तरह से जांचने के बाद और शक्ति के विवेकपूर्ण प्रयोग के तहत दिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अपने आदेश में कहा कि हम कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश में दखल नहीं देंगे, क्योंकि हाईकोर्ट ने कैलिब्रेटेड अभ्यास किया है और हमें इसमें दखल देने का कोई कारण भी नहीं दिखता। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि कोरोना के 3.95 लाख मामलों पर कर्नाटक के मुताबिक 1700 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की जरूरत है। 1100 मीट्रिक टन ऑक्सीजन कर्नाटक की न्यूनतम आवश्यकता है। बता दें कि बीते दिनों कर्नाटक हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कोविड-19 मरीजों के इलाज के लिए राज्य में तरल चिकित्सकीय ऑक्सीजन (एलएमओ) की रोजाना आपूर्ति 965 मीट्रिक टन से बढ़ाकर 1200 मीट्रिक टन करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में इस मामेल की सुनवाई हुई और न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ के समक्ष सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि राज्य को इस समय 965 मीट्रिक टन एलएमओ की आपूर्ति की जा रही है और उस आदेश पर तुरंत रोक लगाने की जरूरत है। इसके बाद पीठ ने कहा कि इस मामले में कोई भी आदेश पारित करने से पहले वह दस्तावेजों को देखेगी। वहीं दिल्ली में ऑक्सीजन संकट पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नसीहत देते हुए कहा है कि आप हमें कड़े फैसले के लिए मजबूर न करें। दिल्ली को प्रतिदिन 700 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की सप्लाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने यह बात कही है। दिल्ली सरकार की ओर से अदालत में कहा गया था कि उसके आदेश के बाद भी हर दिन 700 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की सप्लाई सुनिश्चित नहीं हो पा रही। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को आदेश दिया है कि उसे हर दिन दिल्ली को 700 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की सप्लाई सुनिश्चित करनी होगी। कोर्ट ने कहा कि उसे यह सप्लाई तब तक जारी रखनी होगी, जब तक कि आदेश की समीक्षा नहीं की जाती है या कोई बदलाव नहीं होता।

कोरोना के स्वरूपों का वैज्ञानिक तरीके से पता लगाए सरकार
Posted Date : 07-May-2021 4:54:47 pm

कोरोना के स्वरूपों का वैज्ञानिक तरीके से पता लगाए सरकार

0-प्रधानमंत्री मोदी को राहुल गांधी की पाती
नई दिल्ली,07 मई । कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया कि कोरोना वायरस के सभी स्वरूपों का वैज्ञानिक तरीकों से पता लगाने के साथ ही पूरी दुनिया को इस बारे में अवगत कराया जाए तथा सभी भारतीय नागरिकों को जल्द टीका लगाया जाए।
प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर राहुल ने यह आरोप भी लगाया कि सरकार की विफलता के कारण देश एक बार फिर से राष्ट्रीय स्तर के लॉकडाउन के मुहाने पर खड़ा हो गया है और ऐसे में गरीबों को तत्काल आर्थिक मदद दी जाए ताकि उन्हें पिछले साल की तरह पीड़ा से नहीं गुजरना पड़े।
पत्र में राहुल गांधी ने कहा कि कोरोना की इस सुनामी के अप्रत्याशित संकट में भारत के लोग आपकी सबसे बड़ी प्राथमिकता होने चाहिए। मैं आपसे आग्रह करता हूं कि आप देश के लोगों को इस पीड़ा से बचाने के लिए जो भी संभव हो, वह करिए। उन्होंने कहा कि दुनिया के हर छह लोगों में से एक व्यक्ति भारतीय है। इस महामारी से अब यही पता चला है कि हमारा आकार, आनुवांशिक विविधता और जटिलता से भारत में इस वायरस के लिए बहुत ही अनुकूल माहौल मिलता है कि वह अपने स्वरूप बदले तथा अधिक खतरनाक स्वरूप में सामने आए। मुझे डर इस बात का है कि जिस डबल म्यूटेंट और ट्रिपल म्यूटेंट को हम देख रहे हैं, वह शुरुआत भर हो सकती है। उन्होंने प्रधानमंत्री को सुझाव दिया कि इस वायरस एवं इसके विभिन्न स्वरूपों के बारे में वैज्ञानिक तरीके से पता लगाया जाए। सभी नए म्यूटेशन के खिलाफ टीकों के असर का आकलन किया जाए। सभी लोगों को तेजी से टीका लगाया जाए। पारदर्शी रहा जाए और शेष दुनिया को हमारे निष्कर्षों के बारे में अवगत कराया जाए।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार के पास कोविड के खिलाफ टीकाकरण को लेकर कोई स्पष्ट रणनीति नहीं हैं और सरकार ने उसी समय इस महामारी पर विजय की घोषणा कर दी जब यह वायरस फैल रहा था। उन्होंने कहा कि भारत सरकार की विफलता के कारण आज राष्ट्रीय स्तर पर लॉकडाउन अपरिहार्य लगता है। कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि इस स्थिति को देखते हुए कमजोर तबकों के लोगों को वित्तीय मदद और खाद्य सामाग्री उपलब्ध कराई जाए ताकि लॉकडाउन के कारण गरीबों को उस पीड़ा को न झेलना पड़े जो उन्हें पिछले साल के लॉकडाउन के समय झेलनी पड़ी थी। उन्होंने कोरोना महामारी के खिलाफ लड़ाई में पूरे सहयोग का भरोसा दिलाते हुए कहा कि इस संकटकाल में विभिन्न पक्षों को विश्वास में लिया जाए ताकि सब मिलकर भारत को सुरक्षित रखने के लिए काम कर सकें।

यूएन ने भारत को भेजे 10 हजार ऑक्सीजन कंसंट्रेटर और एक करोड़ मास्क
Posted Date : 07-May-2021 4:54:21 pm

यूएन ने भारत को भेजे 10 हजार ऑक्सीजन कंसंट्रेटर और एक करोड़ मास्क

नई दिल्ली,07 मई । भारत में लगातार कोविड-19 के मरीज बढऩे के कारण देशभर के अस्पताल में मेडिकल ऑक्सीजन व अन्य जरूरी मेडिकल सामग्रियों के अभाव से हाहाकार मचा हुआ है। ऐसे मे दुनिया के अन्य देश लगातार मदद के लिए आगे आ रहे हैं। इसी बीच संयुक्त राष्ट्र की कई एजेंसियों ने भी कोविड-19 महामारी से निपटने के लिए भारत को करीब 10 हजार ऑक्सीजन कंसंट्रेटर भेजे हैं। इसके साथ ही करीब एक करोड़ मेडिकल मास्क भी भेजे हैं।  
देश में कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ी जा रही जंग में मदद करने के लिए कई देश आगे आए हैं और कई देश और विदेशी एजेंसियां भारत को जरूरी मेडिकल सप्लाई भेज रही हैं। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने बृहस्पतिवार को अपने बयान में कहा, ‘भारत में संयुक्त राष्ट्र का दल महामारी से निपटने के लिए राष्ट्रीय और स्थानीय दोनों सरकारों का सहयोग कर रहा है।उन्होंने कहा कि यूनिसेफ, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या निधि (यूएनएफपीए) ने करीब 10 हजार ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, एक करोड़ मेडिकल मास्क और 15 लाख से अधिक फेस शील्ड भारत को भेजे हैं। संयुक्त राष्ट्र के दल ने वेंटिलेटर और ऑक्सीजन उत्पादन संयंत्र भी खरीदे हैं।  

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